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शिक्षकों ने संस्कृत बोर्ड में किया हंगामा

सभी संस्कृत विद्यालयों में प्रायोगिक परीक्षा कराने के मामले को लेकर बिहार संस्कृत शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने बिहार राज्य संस्कृत बोर्ड में कामकाज को ठप करा दिया। सात सूत्री मांगों को लेकर संघ ने बोर्ड कार्यालय पर जमकर हंगामा किया और कहा कि बोर्ड को इस संबंध में शीघ्र आदेश जारी करना चाहिए। बोर्ड ने निर्देश जारी किया था कि केवल सरकारी अनुदान प्राप्त संस्कृत उच्च विद्यालयों में ही 15 से 17 मई के बीच प्रायोगिक परीक्षाएं ली जाएंगी। वहीं संघ की मांग थी कि प्रायोगिक परीक्षाएं सभी संस्कृत उच्च विद्यालयों में ली जाएं। पहले भी सभी संस्कृत उच्च विद्यालयों में बतौर गृह केंद्र प्रायोगिक परीक्षा का संचालन होता रहा है।ड्ढr ड्ढr प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने सुबह से ही बोर्ड कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान उन्होंने कार्यालय को बंद करा दिया और बोर्ड में तालाबंदी भी करा दी। शिक्षकों के विरोध के समक्ष बोर्ड प्रशासन कुछ खास कदम नहीं उठा पाया। शिक्षकों का प्रदर्शन लगभग एक बजे तक चला और इस दौरान कार्यालय में कामकाज नहीं हो पाया। शिक्षकों का कहना था कि वित्तरहित संस्कृत उच्च विद्यालयों के प्रति बोर्ड की नीति उपेक्षापूर्ण है। शिक्षकों की मांग थी कि पंजीयन कराए व फार्म भर छात्रों की परीक्षा तुरंत लेकर उनका रिाल्ट भी साथ-साथ प्रकाशित कराया जाए। इस संबंध में श्रीनिवास चंद्र तिवारी ने बताया कि नियम के अनुसार प्रस्वीकृत संस्कृत विद्यालयों में प्रायोगिक परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि प्रायोगिक परीक्षा के केंद्र के निर्धारण की समीक्षा होगी और जहां केंद्र काफी दूरी पर बनाए गए हैं, वहां निकटवर्ती क्षेत्र में केंद्र बनाने पर विचार किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि बोर्ड पंजीयन कराए व फार्म भर छात्रों की परीक्षा शीघ्र लिया जाएगा।

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