DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सफल फिल्म का सीक्वल बनाना होता है मुश्किल

सफल फिल्म का सीक्वल बनाना होता है मुश्किल

रोहित शेट्टी अब तक ‘गोलमाल’ सीरीज, बोल बच्चन’, ‘सिंघम’ और ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ सहित कई फिल्में निर्देशित कर चुके हैं। इनमें से उनकी अधिकतर फिल्मों ने सौ करोड़ी क्लब में नाम लिखाया है। अब वह फिल्म ‘सिंघम’ का सीक्वल ‘सिंघम रिटर्न्स’ लेकर हाजिर हैं, जिसमें एक्शन के साथ कॉमेडी भी जबरदस्त है।
-आप लगातार सफल फिल्में देते जा रहे हैं। यह कैसे हो पाया?
मैं इसे लक मानता हूं। मेरा लक ही है कि मुङो अच्छी फिल्में निर्देशित करने का मौका मिला। दर्शकों ने मेरी फिल्मों को पसंद किया, अन्यथा एक असफलता निर्देशक को दस साल पीछे ले जाती है। ‘गोलमाल’ सीरीज ने मेरे करियर को नई ऊंचाई दी।

-एक सफल फिल्म का सीक्वल बनाना कितना आसान होता है?
आसान नहीं, कठिन होता है। जब एक सफल ब्रांड को आगे ले जाना होता है, तब हमें पता होता है कि दर्शक पहली फिल्म के पात्रों से परिचित है और वह अपने दिमाग में कुछ खास बात रख कर सीक्वल देखने आता है। सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि सीक्वल के समय पात्रों को सीमित दायरे में ही रखना होता है। पहली फिल्म में जो कैरेक्टर रहा है, उससे अलग नहीं जा सकते। इस दायरे में कुछ नया लिखना काफी कठिन होता है, पर प्रमोशन में इसका फायदा मिलता है। रिलीज के समय हमें दर्शकों को यह नहीं बताना पड़ेगा कि बाजीराव सिंघम कौन है। 

-करीना कपूर का मानना है कि उन्हें ध्यान में रख कर आपने उनके पात्र अवनि को लिखा है?
ऐसा नहीं है, जब हमने दो साल पहले स्क्रिप्ट लिखनी शुरू की तो अवनि का किरदार निखर कर बहुत अहम हो गया। मैं करीना के साथ ‘गोलमाल 2’ और ‘गोलमाल रिटर्न्स’ कर चुका था तो मुझे लगा कि क्यों न उसे लिया जाए। मैंने करीना से फोन पर पूछा कि मैं ‘सिंघम रिटर्न्स’ में उसे लेना चाहता हूं। वह भी तैयार हो गई। ऐसा नहीं है कि मैंने पहले स्क्रिप्ट लिखी और फिर करीना के लिए उसमें बदलाव किए।

-फिल्म महाराष्ट्र की पृष्ठभूमि पर होने की वजह से विलेन के तौर पर प्रकाश राज की जगह अमोल गुप्ते को लिया?
प्रकाश राज का किरदार पिछली फिल्म में मर गया था। उसे जिंदा नहीं किया जा सकता था। फिर कहानी गोवा से मुंबई पहुंच चुकी है। इस बार फिल्म का विलेन भी अलग किस्म का है। इस बार फिल्म में मुद्दा ब्लैकमनी के साथ राजनीतिज्ञों के कारनामों का है। मैंने अमोल गुप्ते को फिल्म ‘कमीने’ में देखा था तो उनकी उस इमेज के अलावा फिल्म में नयापन लाने के लिए उन्हें जोड़ा।

-अमोल तो खुद लेखक-निर्देशक हैं?
हमारी फिल्म में आठ निर्देशक हैं- महेश मांजरेकर, यूनुस सजावल, अनुपम खेर, अजय देगवन आदि। ये सभी फिल्में निर्देशित कर चुके हैं।

-आपने कहा है कि फिल्म में मुंबई को अलग नजरिए से पेश किया गया है?
फिल्म के हिसाब से हमने इसे मुंबई की चंद ऐसी लोकेशनों पर फिल्माया है,जहां अब तक बहुत कम शूटिंग हुई है या जहां शूटिंग की इजाजत नहीं मिलती। 26/11 की घटना के बाद ‘सिंघम रिटर्न्स’ पहली ऐसी फिल्म है, जिसे होटल ताज के सामने व गेटवे ऑफ इंडिया पर फिल्माया गया है। हमने माहीम में मकबूल की मजार पर, कॉटन ग्रीन, रे रोड जैसी रीयल लोकेशनों पर शूटिंग की है।

-मुंबई की बैकड्रॉप पर तो लोग अंडरवर्ल्ड पर फिल्म बनाते हैं, मगर आप ब्लैकमनी पर बना रहे हैं?
हमारी फिल्म में अंडरवर्ल्ड है ही नहीं। मुझे कुछ नया करना था। मुझे लगा कि ब्लैकमनी का मुद्दा चर्चा में है। सरकार ने भी आईएसटी बैठा दी है। इलेक्शन में भी ब्लैकमनी का उपयोग होता है। तो मुझे लगा कि युवा इसके साथ कनेक्ट कर सकते हैं।

-फिल्म इंडस्ट्री में ब्लैकमनी..?
अब वह जमाना गया। अब तो हर फिल्म की फंडिंग कॉरपोरेट घराने कर रहे हैं।

-कॉरपोरेट कंपनियों के आने का असर क्रियेटिविटी पर कितना पड़ा?
कोई असर नहीं। कॉरपोरेट कंपनियां दखलअंदाजी नहीं करतीं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:सफल फिल्म का सीक्वल बनाना होता है मुश्किल