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तेल कंपनियों को नहीं मिली राहत

सरकारी तेल कंपनियों को एक बार फिर से निराशा ही हाथ लगी है। वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने पेट्रोलियम मंत्रालय की तेल कंपनियों को जीवनदान देने के लिए 44 हाार करोड़ रुपये के तेल बांड जारी करने की मांग को सिर से खारिा कर दिया। दरअसल पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल कंपनियों को साल 2007-08 के दौरान हुए 77 हाार करोड़ के भारी-भरकम घाटे की आंशिक भरपाई करने के लिए तेल बांड जारी करने का आग्रह किया था। इस मसले पर मंगलवार को पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम से मुलाकात भी की। बैठक के बाद निराश लग रहे देवड़ा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हमने वित्त मंत्री से कहा कि अब उनकी वित्त मंत्रालय से अपेक्षा है कि वह जितनी भी राशि के बांड जारी कर दे। उन्हें वे स्वीकार होंगे। एक अन्य सवाल के जवाब में देवड़ा ने यह जरूर कहा कि पेट्रोल और डीाल के दाम बढ़ाने के बारे में बैठक में किसी भी तरह की चर्चा होने का सवाल ही नहीं था क्योंकि इसका फैसला मंत्रिमंडल करता है। दरअसल कच्चे तेल के दामों के सार रिकार्ड टूटने से आहत तीनों सरकारी तेल कंपनियों क्रमश: इंडियन आयल कॉरपोरशन (आईओसी), हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरशन लिमिटेड (एचपीसीएल) तथा भारत पेट्रोलियम कॉरपोरशन लिमिटेड ((बीपीसीएल) की कमर टूट गई है। इन्हें हर रो करीब 450 करोड़ का नुकसान हो रहा है। आईओसी, बीपीसीएल तथा एचपीसीएल को प्रति लीटर पेट्रोल पर 10.78 रुपये, डीाल पर 17.02 रुपये, केरोसिन तेल पर 25.23 रुपये और हर एलपीजी सिलेंडर पर 316.06 रुपये का नुकसान हो रहा है। ये खुद दाम बढ़ा नहीं सकती। सियासी मजबूरियों के चलते सरकार तेल कम्पनियों को राहत पहुंचाने के लिए पेट्रोल और डीाल के दाम फिलहाल नहीं बढ़ाएगी।

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