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तीन नए पनबिजलीघरों का निर्माण पूरा

पनबिजली के क्षेत्र में बड़ी ताकत बनने की दिशा में नीतीश सरकार ने तीन और ‘मील के पत्थर’ तय कर लिए हैं। राज्य में तीन नए पनबिजलीघरों का निर्माण पूरा हो गया है। इस प्रकार बिहार में पनबिजली घरों की संख्या नौ तक पहुंच गई है। पांच मेगावाट क्षमता के इन बिजलीघरों के निर्माण के बाद बिहार में हाइड्रो इलेक्िट्रसिटी की स्थापित क्षमता 50 मेगावाट से अधिक हो गई है।ड्ढr ड्ढr इन तीन पनबिजलीघरों की छह इकाइयां अब बिजली उत्पादन के लिए पूरी तरह तैयार हैं। एक ओर जहां बिहार बिजली की घोर किल्लत से जूझ रहा है और राज्य के बड़े क्षेत्र में संकट की स्थिति है, वैसे में छोटी-छोटी पनबिजली परियोजनाएं सूबे को भारी राहत दे सकती हैं। राज्य के आधे दर्जन से अधिक जिलों की औसत मांग पांच मेगावाट तक ही है, वहां ऐसी पनबिजली परियोजनाएं उजाला फैलाने में मददगार हो सकती हैं।ड्ढr ड्ढr बिहार स्टेट हाइड्रोइलेक्िट्रक पावर कारपोरशन (बीएचपीसी) की भारी मशक्कत के बाद रोहतास जिले में जयनगरा और पश्चिम चम्पारण में त्रिवेणी पनबिजली घरों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है जबकि रोहतास में ही नासरीगंज पनबिजली परियोजना का निर्माण भी महज कुछ ही दिन पूर्व सम्पन्न हो गया। हालांकि कुछ माह पूर्व ही रोहतास में एक मेगावाट क्षमता के ढेलाबाग पनबिजलीघर का निर्माण भी पूरा किया गया है। इनमें त्रिवेणी पनबिजली परियोजना की क्षमता तीन मेगावाट है जबकि अन्य दोनों की क्षमता एक-एक मेगावाट की है। नीतीश सरकार के गठन के बाद बिहार में पांच पनबिजलीघरों का निर्माण पूरा हो चुका है। इसके पूर्व अगनूर में भी एक मेगावाट क्षमता के पनबिजलीघर का निर्माण पूरा किया गया और वहां से बिजली उत्पादित हो रही है। इन तीनों पनबिजलीघरों के निर्माण पर 35 करोड़ रुपए से अधिक की लागत आई है। इसके लिए नाबार्ड ने भी लगभग 20 करोड़ रुपए की मदद दी है।

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