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पटना में भी क्लोनिंग!

लोनिंग और पटना में सहसा विश्वास नहीं होता। लेकिन यह सच है राजधानी समेत अन्य इलाकों के मोबाइल और डब्ल्यूएलएल सेट क्लोनिंग करने वालों के निशाने पर हैं। काम करने का समय और तरीका भी ऐसा कि जब तक उपभोक्ताओं को इसकी जानकारी होती है तब तक हाारों की चपत लग चुकी होती है। दोपहर के वक्त जब घर में सिर्फ महिलाएं होती हैं तो कंपनी के कर्मचारी के छद्म नाम से फोन कर सेट के बार में जानकारी मांगी जाती है, जिसमें सेट का ‘ईएसएन’ नंबर भी शामिल है। इस नंबर की जानकारी मिलते ही शुरू हो जाता है क्लोनिंग का खेल।ड्ढr ड्ढr हालांकि देश में तीन साल पहले से ही इस तरह का खेल चल रहा है।ऐसा ही एक वाकया राजधानी में पेश आया। पेशे से इांीनियर ब्रजेश मोहन के टाटा इंडिकॉम पर किसी व्यक्ित ने दोपहर के वक्त फोन किया। कॉल श्री मोहन की पत्नी निर्मला मोहन ने रिसीव किया। फोन करने वाले ने अपने-आप को कंपनी का कर्मचारी बताया और उनसे सेट के बार में जानकारी हासिल करनी चाही। उस व्यक्ित ने बताया कि सव्रे चल रहा और कंपनी को उनके सेट के बार में कुछ जानकारियां चाहिए। उस व्यक्ित ने पहले सेट का नाम पूछा और उसके बाद ‘ईएसएन’ नंबर की जानकारी चाही। निर्मला ने जब मना किया तो उस व्यक्ित ने विश्वास में लेते हुए ‘ईएसएन’ नंबर ले लिया। यह घटना 28 अप्रैल की थी, इसके बाद पांच मई को अचानक कंपनी के कस्टमर केयर से फोन आया कि आपका बिल 1500 रुपए हो गया है और जल्द से जल्द इसे जमा करं। तीन दिनों के बाद फिर जब दो हाार रुपए के बिल की सूचना आई तो मोहन दंपत्ति चौंके। उन्होंने तत्काल अपना फोन बंद कर दिया। और इसकी लिखित शिकायत कंपनी को दी। पहले तो कंपनी के कर्मचारियों ने विश्वास नहीं किया लेकिन जब फोन को ऑन किया गया तो उसपर अमृतसर बात हो रही थी। फोन करने वाले ने श्री मोहन के साथ गालीगलौज भी की। दूसरी ओर टाटा टेलीसर्विसेंज (बिहार-झारखंड) के सीओओ जेड एम सिद्दीकी ने बताया कि यह क्लोनिंग का पहला मामला है, जो प्रकाश में आया है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि किसी भी हालत में अपने सेट का ‘ईएसएन’ नंबर किसी को न दें।

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