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देश व धर्म की मोहताज नहीं इंसानियत

इंसानियत का जज्बा दश, जाति और धर्म का माहताज नहीं हाता। वह ता किसी दूसर इंसान का दखकर आप ही फूट पड़ता है। इंगलैण्ड की एस्थर शकार एस ही बिरल इंसानां मं स है, जा जयपुर मं बम धमाकां क बाद सब कुछ भूल कर फ्लारंस नाइटंगल क रूप मं घायलां की सवा मं जुट गई। बर्मिगम की हरन वाली आपदा प्रबंधन की छात्रा एस्थर जयपुर घूमन क लिय आई थी। धमाकां क समय वह अपन हाटल मं थी। जब उसन टीवी पर धमाकां की खबर और घायलां की तस्वीरं दखी ता तुरंत पुलिस का फान कर अपनी मदद की पशकश की। वहां स सवाई मानसिंह अस्पताल का पता लकर वह बिना क्षण गवांए वहां पहुंची और पूरी रात घायलां की मरहम पट्टी और सवा सुश्रुषा मं लगी रही। उसन हिन्दुस्तान का बताया कि वह हादसां स निपटन क लिय प्रशिक्षित है लकिन इस तरह की दुखांतिका उसन पहली बार दखी। अपनी पढ़ाई क अंतर्गत एस्थर न एम्बुलंस सवाआं मं चिकित्सा स्वयंसवक क रूप मं काम किया है। चार साल क कार्स क दौरान तीसर साल वह पुण स्थित एक स्वयंसवी संगठन मं एक साल की इंटर्नशिप करन आई हुई थी। उसन बताया कि कार्स पूरा करन क बाद वह सामवार का जयपुर घूमन आई थी और अब कल वापस जान का इरादा रखती है।ड्ढr सवाई मानसिंह अस्पताल मं नर्सिग स्टाफ क सदस्य राजकुमार जयपाल ल हिन्दुस्तान का बताया कि जब उन्हांन इस महिला का दखा औश्र इधर-उधर किसी का दखत पाया ता पूछा कि वह क्या चाहती हैं ता उसन बताया कि वह मदद करन आई है।ं

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