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नेताओं के झांसे में न आएं अधिकारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने गुरुवार को सभी नौकरशाहों को कामकाज में राजनीतिक रूप से तटस्थ रहने का मंत्र दिया। कहा गया है कि अफसर, नेताओं के झांसे में न आएं। कार्मिक मंत्रालय ने नौकरशाहों के सेवा नियमों में संशोधन करके नए प्रावधान भी जोड़े हैं, जिन्हें तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।   

अफसरों के लिए नए नियम: कार्मिक मंत्रालय ने ऑल इंडिया सर्विस (कंडक्ट) एमेंडमेंट रूल्स 2014 जारी किए हैं। इसके तहत पुराने नियमों में दो उप नियम जोड़े गए हैं। इसमें नौकरशाहों के आचरण के लिए छह नए नियम जोड़े गए हैं। इनमें महत्वपूर्ण है कि अफसर नेताओं और दलों से प्रभावित न हों।

निजी हित सार्वजनिक करने होंगे: मंत्रालय ने कहा है कि अफसरों को अपने निजी हित सार्वजनिक करने होंगे ताकि आधिकारिक कार्य तथा हितों के बीच कोई टकराव न हो। मसलन, हितों का पता चलने पर अफसरों की ऐसे महकमे में तैनाती नहीं होगी, जिससे जुड़ा काम उनके परिवार का सदस्य करता हो।

दल विशेष के प्रति दिखी अफसरों की निष्ठा: दरअसल, देखने में आया है कि कई नौकरशाहों की निष्ठा किसी दल विशेष के प्रति जुड़ी होती हैं। केंद्र में भले ही यह उतनी न दिखे लेकिन राज्यों में यह स्थिति गंभीर है।

नेताओं से जुड़ाव पर नपेंगे नौकरशाह: नए नियमों के लागू होने पर अगर अफसरों का किसी भी राजनीतिक दल व नेताओं से जुड़ाव सामने आता है तो उनके खिलाफ विभागीय जांच और कार्रवाई हो सकती है। मंत्रालय ने इस मसले पर राज्यों से भी मशविरा किया था।

सुधार के 10 कदम
1. उच्च नैतिक मानकों का पालन,सत्य निष्ठा एवं ईमानदारी से कार्य करेंगे
2. गुण, निष्पक्षता तथा बिना किसी भेदभाव के कर्तव्य निर्वहन करेंगे
3. अपने कार्य में जवाबदेही एवं पारदर्शिता लाएंगे
4. कमजोर वर्गों के साथ कार्य करने की इच्छाशक्ति होनी चाहिए
5. जनता के साथ सम्मानपूर्ण और अच्छा व्यवहार करेंगे
6. जो भी निर्णय करेंगे वह जनता के हितों के मद्देनजर होगा
7. सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल प्रभावी, किफायत, दक्षता से करेंगे
8. खुद को किसी व्यक्ति, संस्था के आर्थिक प्रभाव के अधीन नहीं लाएंगे
9. पद का दुरुपयोग नहीं करेंगे, किसी आदेश से निजी लाभ नहीं लेंगे
10. सभी निर्णय और सिफारिशें गुणों के आधार पर होंगी

मोदी की नसीहतें
- मंत्री निजी स्टाफ में रिश्तेदार न रखें
- नवनियुक्त मंत्री पिछली सरकार के मंत्रियों के स्टाफ को भी न रखें
- मंत्रियों के निजी सचिव और ओएसडी की जांच पीएमओ से जांच के बाद ही होगी
- सचिव बेखौफ होकर काम करें

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