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भ्रष्टाचार के कारण चीनी कंपनियों को घाटा

लगातार प्रगति की ओर कदम बढ़ाता भारतीय बाजार अब काफी बड़ा हो चुका है। एसे में बाहर से आने वाली कंपनियां यहां अपने लिए अनुकुल वातावरण तलाश कर लाभ कमा रहीं हैं। इसी दौड़ में शामिल चीनी कंपनियां तो अपने सस्ते माल के कारण पूर विश्व में चíचत हैं। लेकिन फिलहाल ये कंपनियां भारत में बढ़ते भ्रष्ट्राचार और टैक्स से बेहाल हैं। जी हां। कम कीमतों में अच्छी चीजें देने का दावा करने वाली चीनी कंपनियों को भारत में घाटे का सामना कर पड़ रहा है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार के अनुभव और सस्ती तकनीकों से बनाए सामानों से पूर विश्व को आर्कर्षति करने वाली चीनी कंपनियों के लिए अन्य देश वासियों के मुकाबले भारत वासियों को अपना ग्राहक बनाने में कठिनाई हो रही है। दरअसल अमेरिका जसे विकसित देशों में लोग टीवी और डीवीडी जसी मंहगी चीजों को भी डिस्पोज्ल के रुप में देखते हैं। जबतक चला तब तक ठीक अन्यथा फेंक कर नया ले आओ। लेकिन भारत जसे विकासशील देश में लोग एक बार पैसा खर्च कर िंजंदगी भर के लिए निश्िंचत हो जाना चाहते हैं। एसे में सस्ती दरों में उपलब्ध चीनी सामानों के प्रति लोगों की धारणा ज्यादा पैसे खर्च करने की नहीं है। छोटे-मोटे सामानों जसे बच्चों के खिलौने, गिफ्ट आइटम और घरलू समानों के लिए तो भारत में चीनी प्रोडक्टों को अहमियत मिल गई है, लेकिन मंहगी चीनी तकनीकी वस्तुओं को खरीदने में अभी भी भारतीय ग्राहक हिचकता है।भारतीय बाजार में चीनी कंपनियों के लिए वस्तुओं की लागत- लाभ तो बिल्कुल ही खत्म हो जाती है। यहां के बाजार में आते ही चीनी सामान 30 फीसदी मंहगे हो जाते हैं। उसके अलावा, वस्तुओं को एक राज्य से दूसर राज्यों में ले जाने से उनमें 12.5 फीसदी की दर से टैक्स जुड़ जाता है। इतना ही नहीं, भारतीय तकनीकी क्षेत्र के कर्मचारियों की वेतन 20फीसदी के हिसाब से बढ़ती ही जा रही है।

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