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सूबे के 27 प्रखंडों में एक भी बैंक नहीं

वित्तीय सेवाओं के पैमाने पर बिहार फिसड्डी है। इसका जिक्र सांस्थिक वित्त विभाग ने बिहार राज्य बैंकर्स समिति की बैठक (एसएलबीसी) के लिए जारी अपनी रिपोर्ट में किया है। सरकार की बार-बार की फटकार का भी कोई नतीजा नहीं निकल पा रहा है। यह भी आश्चर्यजनक है कि यहां सवा करोड़ से अधिक की आबादी के लिए बैंक नहीं है।ड्ढr ड्ढr आरबीआई की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि राष्ट्रीय औसत 15 हजार के मुकाबले बिहार में 20,500 लोगों पर एक बैंक है जबकि 27 प्रखंड ऐसे हैं जहां एक भी बैंक नहीं है। वहीं पंजाब में औसत 000, महाराष्ट्र में 11000 और पश्चिम बंगाल में 14000 की आबादी पर एक बैंक है। राष्ट्रीय औसत तक पहुंचने के लिए बिहार में अभी 2,276 बैंक शाखाएं खोले जाने की जरूरत है। इसके मद्देनजर सभी डीएम से कहा गया है कि वे नई शाखाओं के लिए जगह चिह्न्ति करं और जिलास्तरीय समन्वय समिति की मंजूरी के बाद इस संबंध में बैंकों को प्रस्ताव भेजें। वहीं बैंकों से भी हर प्रखंड में जल्द से जल्द शाखा खोलने के उपाय करने को कहा गया है। विभाग ने कहा है कि शाखाओं के विस्तार के मसले पर कई बार बैंकरों से बात हो चुकी है मगर इसका अब तक कोई परिणाम नहीं निकल सका है। एसएलबीसी की बैठक में यह मुद्दा उभरकर आया कि राज्य के कई जिलों में सीडी रशियो नहीं बढ़ पाने का एक प्रमुख कारण शाखाओं की कमी का भी होना है। वहीं सरकार ने बैंकों को अगले चार साल में हर परिवार के लिए खाता खोलने का जो लक्ष्य दिया है वह भी कोई कम चुनौतीपूर्ण नहीं है।

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