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आज नये एमओयू की तैयारी

राज्य बनने के बाद से एनडीए और यूपीए सरकार ने दिसंबर 2007 तक कुल 64 एमओयू किये। अब तक एमओयू किये इन कंपनियों को राज्य सरकार न तो जमीन उपलब्ध करा पायी और न ही खनिज लीज पट्टा। पहले यूपीए ने एनडीए सरकार पर आरोप लगाया था कि निजी स्वार्थ के लिए एमओयू हो रहे हैं। कोई धरातल पर नहीं उतर रहा है। अब जब यूपीए की सरकार है तो एनडीए वाले यही बात दोहरा रहे हैं। कंपनियां जमीन और खनिज लीज के लिए दौड़ रही हैं। बावजूद इसके फिर से राज्य सरकार गुरुवार को कुछ कंपनियों के साथ एमओयू करने जा रही है।ड्ढr मुख्य सचिव एके बसु की अध्यक्षता में गठित हाइपावर कमेटी की बैठक कल होने वाली है। राज्य में उद्योग लगाने के उद्देश्य से नया एमओयू करने के लिए 17 आवेदन संबंधित विभाग को प्राप्त हुए हैं। इसमें से 11 कंपनियों के नाम एमओयू के लिए बढ़ाये जाने की संभावना व्यक्त की गयी है। साथ ही जिन कंपनियो के एमओयू की अवधि समाप्त हो गयी है, उनके अवधि विस्तार पर भी निर्णय लिया जायेगा।ड्ढr भाजपा के अध्यक्ष पीएन सिंह ने कहा कि सरकार पहले वाली कंपनियों के लिए कुछ कर नहीं पा रही है और नया एमओयू करके राज्य के सिर पर बोझ लाद रही है। एमओयू संभावित कंपनियां : गोल्ड लाइन इंडस्ट्रीज, सेल, ब्रह्मपुत्र मेटल, स्टेको पावर एंड स्टील, साइनो स्टील, भूषण स्टील,अनिल इंडस्ट्रीज, हाइटेक आयरन एंड स्टील, पवनजय स्टील, विनी आयरन, विनायक इंडस्ट्रीजड्ढr जिनके अवधि विस्तार का है प्रस्ताव : इस्पात इंडस्ट्रीज, सार्थक इंडस्ट्रीज, जिंदल स्टील एंड पावर, अभिजीत ग्रुप, आधुनिक स्टील, ब्राह्मी इंपेक्स, जगदंबा स्टील, मां चंडी दुर्गा स्टील, रांची इस्पात इंडस्ट्रीज

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