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‘भूत’ भगाने को चल रही ‘ओझाई’

चारा घोटाले के ‘भूत’ को भगाने के लिए पशुपालन विभाग में आजकल ‘ओझाई’ चल रही है। सरकार चाहती है कि घोटाले का ‘भूत’ अधिकारियों को छोड़ दे और वे भूल जाएं ‘इतिहास’ को। हालांकि ‘भूत’ का भय अभी इस कदर हावी है कि अधिकारी बाल्टी खरीदने के लिए भी टेंडर निकाल रहे हैं। लेकिन सरकार ने उन्हें वित्तीय प्रबंधन का पाठ पढ़ाना शुरू कर दिया है। क्लास लेने वाले हैं पशुपालन एवं मत्स्य निदेशक डा. एन सरवण कुमार और पढ़ने वाले हैं कनीय अधिकारी।ड्ढr ड्ढr वर्ष 1से 2005 तक सीबीआई और निगरानी से घिर इस विभाग के अधिकारी अब विभाग को फिर से पटरी पर लाने में लग गये हैं। सरकार ने भी उनकी लगन को देख 15 करोड़ के योजना बजट को बढ़ाकर लगभग दो सौ करोड़ कर दिया है। इस निर्णय से प्रसन्न विभागीय अधिकारी भी इस बात पर एकमत है कि ‘वनवास’ की अवधि समाप्त हुई। लेकिन सामने चुनौती है 180 करोड़ रुपये खर्च करने की। नतीजा कई योजनाओं पर एक साथ काम शुरू कर दिया गया है।ड्ढr विभाग के कार्य अब जमीन पर दिखने लगे हैं। निदेशक डा. एन सरवण कुमार ने बताया कि पशुपालन और मत्स्यपालन के क्षेत्र में राज्य की विकास दर को बढ़ाये बिना कृषि विकास का लक्ष्य प्राप्त करना आसान नहीं है। कृषि और पशुपालन एक-दूसर के पूरक हैं। यही कारण है कि सरकार की पहली प्राथमिकता पशुओं का नस्ल सुधारना है। केवल इनकी संख्या बढ़ाने से लाभ नहीं होने वाला। राज्य में मात्र 12 लाख पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान होता है जबकि आंध्रप्रदेश में यह संख्या 60 लाख और तामिलनाडु में 52 लाख है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को यह बताने की कोशिश की जा रही है कि सरकार का उनपर भरोसा है और छोटे-छोटे खर्च के लिए टेंडर निकालने की कोई आवश्यकता नहीं। सरकारी प्रावधानों के अनुसार खरीद करने में कोई लफड़ा नहीं है।

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