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ामशेदपुर के डीसी-एसडीओ का ट्रान्सफर विवाद बना हुआ है। नौकरशाही विचलित है, विपक्ष आक्रामक! सरकार मौन साधे है और जनता ऊहापोह में। एक कड़वा सच तो यह भी कि ट्रान्सफर-पोस्टिंग का विवाद झारखंड में आये दिन दिखता है। ऐसे हालात उत्पन्न ही क्यों होते हैं? कहीं न कहीं प्रणाली की त्रुटियां हैं। मनचाही पोस्टिंग के लिए पैरवी के खुले दरवाजे हों या सजा के तौर पर अकारण स्थानांतरण। ये क्षोभ और अराजकता ही बढ़ायेंगे। क्यों न कोई ऐसी प्रणाली विकसित हो, जिसमें उपयुक्त अफसर माकूल स्थान पर नियत लक्ष्य देकर पारदर्शिता के साथ नियुक्त किये जायें। प्रदर्शन के लिए उन्हें पर्याप्त समय और अवसर मिले। लब्बो-लुवाब यह कि ट्रान्सफर-पोस्टिंग विकासोन्मुख प्रशासन की रणनीति हो, न कि स्वार्थपूर्ति या प्रतिशोध का हथियार।

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