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हथियारबंद ग्रामीणों ने रोका जिंदल का काम

हथियारबंद ग्रामीणों ने 14 मई को विस्थापित समिति के बैनर तले जिंदल स्टील के बलकुदरा स्थित निर्माणाधीन संयंत्र का काम पूरी तरह ठप करा दिया। आसपास के गांवों के महिलाओं-पुरुषों ने फैक्ट्री गेट को जाम कर जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रबंधन की मजदूर-बेरोगार विरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर नारबाजी की। ग्रामीण स्थानीय ठेका कंपनी आइसीआरसीएल द्वारा 13 मई को स्थानीय बेरोगारों को पिटवाने से भड़के थे। वे उस ठेका कंपनी को नियंत्रित करने, बेरोगारोंे को योग्यता के आधार पर रोगार देने और उन्हेंं कंपनी रौल के मुताबिक स्थायी करने, बासल के विस्थापितों को रोगार देने के साथ ही साथ बहला-फुसलाकर स्थानीय लोगों की जमीन लेने की प्रक्रिया ब करने की मांग कर रहे थे। ग्रामीणों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए पतरातू इंस्पेक्टर ट७ी बागे खुद बासल और पतरातू थाना पुलिस बल के साथ वहां कैंप कर गये। बाद में प्रबंधन ने वार्ता के लिए ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल को बुलाया। ग्रामीण अपनी मांगों पर अडिग रहे, जिस कारण वार्ता विफल हो गयी। फिर क्या था, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे लोगों ने मांगें पूरी होने तक यहां का कामकाज ठप रखने की घोषणा कर दी है। उधर इस प्रकरण से प्रबंधन पूरी तरह सकते में है। संभावना है कि 15 को कंपनी के अधिकारी ग्रामीणों से वार्ता कर हल निकालेंगे। प्रदर्शन में झरी मुंडा, बाबूलाल, गोविंद करमाली, रामविलास करमाली, विजयनाथ मुंडा, सज्जाद अंसारी, दिनेश मुंडा, विनोद साव, सुखदेव, चेता उरांव, चंदन उरांव, तालेश्वर आदि शामिल थे।

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