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आदेश के बाद भी जेइ पर केस नहीं

मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी पश्चिमी सिंहभूम की विभिन्न विकास योजनाओं में बीस करोड़ से भी अधिक रूपये की अग्रिम राशि निकालकर अपने पास रखने वाले 10 कनीय अभियंताओं के खिलाफ एफआइआर बुधवार तक दर्ज नहीं करायी गयी है। हालांकि जिले के उपायुक्त महेश प्रसाद सिन्हा ने कहा है कि इसके लिये प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है तथा 2-3 दिनों में एफआईआर करा दी जायेगी। उन्होंने स्वीकार किया है कि इस संबंध में उन्हें विकास आयुक्त का पत्र मिल चुका है। विभिन्न योजनाओ में 50 लाख या उससे अधिक की राशि असमायोजित अग्रिम के रूप में अपने जिम्मे रखने वाले जिले के दस जेइ के खिलाफ स्थानीय थाना में एफआइआर कराने का आदेश मुख्यमंत्री ने 2 मई को ही दिया था। इसके बाद विकास आयुक्त एके सिंह 10 मई को उपायुक्त को एक पत्र भेजकर दस कनीय अभियंताओं के खिलाफ एफआइआर कर उन्हें सूचित करने को कहा था। लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं कर इस पत्र के मिलने के बाद उपायुक्त ने उप विकास आयुक्त को इस संबंध में कार्रवाई करने का निर्देश देते हुये सभी विभागों से असमायोजित राशि का अद्यतन प्रगति प्रतिवेदन मंगाने को कहा था। इसके बाद उप विकास आयुक्त ने सभी विभागों से कनीय अभियंताओं को दी गयी असमायोजित अग्रिम राशि का विवरण 13 मई तक मांगा था। इधर मुख्यमंत्री ने कहा कि उन अभियंताओं के खिलाफ शीघ्र प्राथमिकी होगी। उन्हें मामले की लीपापोती का मौका नहीं दिया जायेगा। उन्होंने डीसी से वहीं पूछा कि एफआइआर कराने संबंधी पत्र उन्हें मिला है कि नहीं। इस पर उपायुक्त ने पत्र मिलने की बात स्वीकार करते हुये कहा कि इसके लिये प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है। एनआरईपी के जिम्मे11 करोड़ से भी अधिक , विशेष प्रमंडल के जिम्मे 5 करोड़ से भी अधिक तथा लधुसिंचाई विभाग के जिम्मे 3 करोड़ रूपये की राशि है। अन्य विभागों के जिम्मे भी 1-2 करोड़ रूपया बकाया है। कुल मिलाकर यह राशि 20 करोड़ रूपये के लगभग है।

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