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अब उजाले में कटेगी इनकी जिंदगी

किसी के रहमोकरम पर अब नहीं रहेंगी अबला व बेबश नारियां। देह व्यापार में धकेली गयीं महिलाओं व युवतियों की जिंदगी अब अंधेर में नहीं कटेगी। उनके जीवन में भी उजाला आएगा। वह भी खिलखिला सकेंगी। उन्हें किसी के सहार की जरूरत न होगी। उनके हाथों को हुनरमंद बनाया जाएगा। वीमेन ट्रैफिकिंग की शिकार महिला व युवतियों के पुनर्वास के लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा उज्जवला योजना को सरजमीन पर उतारने की कवायद शुरू कर दी गयी है।ड्ढr ड्ढr केन्द्र प्रायोजित इस योजना को स्वैच्छिक संगठनों की मदद से सूबेभर में चलाया जाएगा। राज्य सरकार की भूमिका महज इतनी होगी कि वह योजना की बाबत स्वैच्छिक संगठनों की अनुशंसा करगा। समाज कल्याण विभाग द्वारा इस बाबत स्वैच्छिक संगठनों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। विभिन्न जिलों के माध्यम से स्वैच्छिक संगठनों की अनुशंसा विभाग के पास आने लगे हैं। इन प्रस्तावों में स्वैच्छिक संगठनों द्वारा यह बताया गया है कि उनके द्वारा कैसे ट्रैफिकिंग की शिकार महिलाओं को हुनरमंद बनाया जाएगा। मुख्यालय स्तर पर स्वैच्छिक संगठनों के प्रस्तावों की समीक्षा कर केन्द्र के पास उसे भेजा जाएगा। केन्द्र द्वारा हरी झंडी दिखाए जाने के बाद हर जिले में योजना को चलाने के लिए स्वैच्छिक संगठनों को नामित किया जाएगा। मिली जानकारी के मुताबिक किसी जिले में एक तो कहीं दो ऐसे पुनर्वास केन्द्र भी खोले जा सकते हैं। एक पुनर्वास केन्द्र चलाने के लिए लगभग 18.5 लाख रुपए दिए जाने का अनुमान है। इन पुनर्वास केन्द्रों में ट्रैफिकिंग की शिकार महिलाओं को स्वरोजगार के लिए तरह-तरह के प्रशिक्षण दिए जाएंगे। उन्हें हस्तशिल्प, हस्तकरघा,पेंटिंग, सिलाई-कटाई सहित कई आधुनिक व्यावसायिक कोर्सो में भी दक्ष किया जाएगा। इस बाबत समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव विजय प्रकाश ने बताया कि यह योजना केन्द्र की है जो सीधे एनजीओ को देती है। राज्य सरकार द्वारा स्वैच्छिक संगठनों की अनुशंसा केन्द्र के पास भेजी जाएगी।ं

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