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आधी रात अफसरों का तबादला, नयी बात नहीं निमिषा?3द्वद्यज्ठ्ठड्डद्वद्गह्यश्चड्डष्द्ग श्चrद्गथ्न्3 = o ठ्ठह्य = ह्वrठ्ठज्ह्यष्द्धद्गद्वड्डह्य-द्वन्ष्roह्यoथ्ह्ल-ष्oद्वज्oथ्थ्न्ष्द्गज्oथ्थ्न्ष्द्ग

अधिकारियों को आधी रात में बदलना कोई नयी बात नहीं। बदली के बाद, नये अधिकारी को, रातोंरात प्रभार ग्रहण कराना या उन्हें उस जगह पर एयर ड्रॉपिंग कराना भी कोई नयी बात नहीं है। ऐसा केवल झारखंड, बिहार में ही नहीं, बल्कि पूर देश में होता है। यह हमेशा हुआ है, हमेशा होगा। सरकार का यह सोच है कि कम-से-कम ऐसा करने से जनता समझती है कि सरकार काम कर रही है। सरकार को भी कुछ उपलब्धि हासिल करने की, ख्याली संतुष्टि प्राप्त हो जाती है। ऐसी कार्रवाई के बाद प्रशासनिक संघों की बैठक, कार्य का बहिष्कार, विभिन्न संस्थाओं, पार्टियों द्वारा इसकी आलोचना भी कोई नयी बात नहीं है। वास्तव में रातों-रात बदली, संघों की बैठक, कार्य का बहिष्कार, सरकार की आलोचना आदि कोई मुद्दा नहीं है। वर्तमान में, गर्मी केमाह में पानी-बिजली की कमी को लेकर रांची शहर में बंदी, रोड जाम, धरना आदि के कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। लगता है, सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा यही दोनों हैं, लेकिन मुद्दा यह भी नहीं है। भ्रष्टाचार के समाचार हर मीडिया में भर रहते हैं। लेकिन भ्रष्टाचार भी मुद्दा नहीं है। मुद्दा कुछ और है, बल्कि यों कहें कि उक्त सार मुद्दे बीमारी के लक्षण हैं, न कि बीमारी के कारण। भारत में खासकर मीडिया में, हमेशा बीमारी के लक्षण का इलाज करने पर ध्यान दिया जाता है, जबकि बीमारी के कारणों के उपाय का कोई प्रयास नहीं किया जाता है। जब तक बीमारी के कारणों को नहीं हटाया जाता, बीमारी अस्थायी रूप से कुछ घटती जरूर है, लेकिन पुन: दोगुने परिमाप से प्रकट होती है। आज की अर्थव्यवस्था, नॉलेज अर्थव्यवस्था है। इनोवेशन का जमाना है। जो व्यवस्था इनोवेटिव नहीं होती, वह प्रगति नहीं कर सकती। सरकारी व्यवस्था में तो इनोवेशन नाम की चीज नहीं है। सरकारी व्यवस्था में इनोवेटिव होने का कोई स्कोप नहीं है, जबकि नयी व्यवस्था के आविष्कार में ट्रायल एंड एरर (गलती) अत्यावश्यक है। जारी..विकास के असली मुद्दे‘री-इनवेस्टिंग गवर्नमेंट एंड पब्लिक सेक्टर’ बहुत अच्छी किताब है। इसमें अमेरिका में पब्लिक एडमिनिस्ट्रशन में हुए सुधारों के उपायों पर विस्तृत चर्चा है। पब्लिक एडमिनिस्ट्रशन से संबंधित निम्न मुद्दों पर इस किताब में निम्न पृष्ठों पर चर्चा हुई है- विषय पृष्ठों की संख्या प्रतिस्पर्धा 100 सर्विस डिलिवरी 18 सिविल सर्विसेज रिफॉर्म 13 एकाउंटेबिलिटी 11 भ्रष्टाचार 08 परिणामोन्मुख प्रशासन 07तथ्यों से स्पष्ट है कि इस किताब में भ्रष्टाचार के संबंध में बहुत कम चर्चा हुई है, जबकि अन्य मुद्दे, जो असल मुद्दे हैं, उस पर चर्चा की गयी है। प्रतिस्पर्धा पर 100 पन्नों में चर्चा है, जबकि भ्रष्टाचार पर केवल आठ पन्नों में ही चर्चा है। सीधे अर्थो में भ्रष्टाचार की महत्ता, प्रतिस्पर्धा की महत्ता का केवल 13 प्रतिशत ही है। मोटे तौर पर भारत में भी भ्रष्टाचार का मामला 10-15 प्रतिशत ही महत्वपूर्ण है। ं

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