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हाइपरसोनिक ब्रह्मोस के शुरुआती परीक्षण सफल

वनि की गति से पांच गुना यादा रफ्तार से चलने वाली हाइपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और उसकी जमीनी परीक्षण सफल साबित हुए हैं। भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीआे) के चीफ कंट्रोलर शिवतनु पिल्लै ने बताया कि हैदराबाद स्थित उनकी प्रयोगशाला में हाइपरसोनिक ब्रह्मोस ने प्रयोगशाला के स्तर पर किए गए परीक्षण में 5.26 मैक गति हासिल करने में कामयाबी हासिल कर ली है। पांच मैक यानी ध्वनि की गति से पांच गुना अधिक रफ्तार को हाइपरसोनिक गति कहा जाता है। डॉ पिल्लै ने बताया कि पिछले दो महीने में प्रयोगशाला के स्तर पर ब्रह्मोस दो के लगातार परीक्षण चल रहे हैं और मिसाइल अब ड्राइंगबोर्ड से कहीं आगे निकल गई है। उन्होंने कहा कि इन परीक्षणों से यह साबित हो गया है कि ब्रह्मोस एयरोस्पेस की हाइपरसोनिक मिसाइल की संकल्पना साकार होने के रास्ते पर बढ़ चली है। उन्होंने कहा कि हाइरपरसोनिक मिसाइल में एविएशन कैरोसिन ईंधन का इस्तेमाल किया जा रहा है जिसका दस साल तक भंडारण किया जा सकता है। इस नई तकनीक में सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के रैम जैट इंजन के बजाए स्क्रैम जैट इंजन का उपयोग किया जा रहा है। यह रैम जैट की अगली पीढ़ी है। स्क्रैम जैट इंजन के प्रयोगशाला परीक्षणों की कंप्यूटिंग फ्यूल डायनामिक्स (सीएफडी) भी तैयार की जा रही है ताकि आरंभिक आंकड़ों को कंप्यूटर में एकत्र कर परीक्षणों की संख्या घटाई जा सके। इस बीच जानकार सूत्रों ने बताया कि डीआरडीआे और रूस के एनपीआे मशीनोस्त्रेनिया की संयुक्त तकनीकी-वाणियिक समिति हाइपरसोनिक मिसाइल परियोजना का पूरा खाका तैयार करने में जुटी है। इस परियोजना पर एक अरब डालर लागत आने का अनुमान है।

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  • Web Title: हाइपरसोनिक ब्रह्मोस के शुरुआती परीक्षण सफल