अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

जंग और जश्न

ेन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ. अम्बुमणि रामदास व अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के प्रख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पी. वेणुगोपाल की आपसी जंग से हमें कोई सरोकार नहीं। वेणुगोपाल की बहाली की खुशी में एम्स में पटाखों, रोशनी व मिठाइयों से जश्न मनाया गया। यह संस्थान कोई क्लब, बारात घर, या मनोरांन स्थल तो है नहीं, जहां पर इस प्रकार से खुशियां मनाई जाएं। यहां भारत के कोने-कोने से असहाय, लाचार, लाइलाज बीमारियों के रोगी व उनके तीमारदार आते हैं, जो तन, मन, धन सभी कारणों से दुखी होते हैं, जिनका रात-दिन संस्थान के प्रांगण में, बरामदे, खुले आसमान के नीचे व्यतीत होता है। इस प्रकार की खुशियां, जश्न देखकर उन गर्दिश के मारों के मन पर क्या प्रभाव पड़ता होगा?ड्ढr , दिल्लीड्ढr वोट की ताकत पहचानेंड्ढr भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है। भारत में हम अपनी इच्छा से अपने वोट का प्रयोग करके सरकार बनाते हैं। अगर चुनाव में हमसे कोई भूल हो जाती है तो पांच साल बाद फिर से वोट डालकर सही और गलत उम्मीदवार का फैसला करते हैं। वोट की ताकत पहचानते हुए हमें अच्छे उम्मीदवारों का चयन करना चाहिए। जातिवाद, परिवारवाद, भाषावाद और क्षेत्रवाद से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता देनी चाहिए। हम जसे उम्मीदवार को चुनेंगे, वैसा ही विकास होगा। माना कि जितने भी उम्मीदवार मैदान में हैं सब भ्रष्ट हैं फिर भी हमें अपनी समझ से उनमें से कम भ्रष्ट प्रत्याशी का चुनाव करना होगा। कभी यह ना समझें कि मेर एक वोट ना डालने से क्या फर्क पड़ता है। इससे गलत प्रत्याशी जीत जाते हैं। वोट जरूर डालें।ड्ढr धर्मपाल वाल्मीकि, जाणी, करनालड्ढr वाह साहिब, क्या खूब कहा!ड्ढr विश्व भर में चल रही खाद्यान्न की कमी के बार में जब अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश साहिब से इसका कारण जानने की कोशिश की गई तो बात उनकी समझ से बाहर होते हुए भी कुछ तो कहना ही था, नहीं तो लोग समझते कि विश्व का सबसे ताकतवर व्यक्ित, जो चाहे तो डंडे के बल पर उबले हुए अंडे से भी चूजा निकाल दे, इतना भी नहीं जानता! फट से कह दिया ‘खाद्यान्न की किल्लत का कारण है भारत का समृद्ध मध्यम वर्ग, वह पेटू है, बहुत अनाज खाता है।’ वाह साहिब, खूब कहा।ड्ढr डॉ. आर. के. मल्होत्रा, नई दिल्लीड्ढr अब यहां भी झांक लेंड्ढr आदरण़्ाीय बुश (कनिष्ठ) जी को अचानक ‘इलहाम’ हुआ कि यार ये एशिया वाले (उसमें भी भारत और चीन वाले) इतना खाते क्यों हैं। उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ नहीं कि उन्होंने मीडिया-ए-सियासत में प्रवचन भी देना शुरू कर दिया। जाहिर है कुछ चेले-चपाटे भी मैदाने-ांग में आ गए। लेकिन बुश जी अगर अपने गिरबां में झाँक लेते तो उनके ‘अमूल्य वचन’ बच जाते और कुछ कमजोर देशों को हड़काने के काम आते। ‘फास्ट फूड’ के ‘फास्ट’ देश को अपना एक प्रबुद्ध प्रतिनिधिमंडल विदर्भ, आंध्र प्रदेश, कालाहांडी और सुदूर दक्िखन के पठारों पर ोजना चाहिए और उन्हें उतना ही ‘भरपेट भोजन’ देना चाहिए जितना कि इन स्थानीय लोगों को मिलता है।ड्ढr नीलाम्बुज सिंह, नई दिल्लीड्ढr

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: जंग और जश्न