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बीएयू ने विकसित की सरगुजा की नयी किस्म

बिरसा कृषि विवि ने सरगुजा (नाक्षर) की नयी किस्म विकसित की है। इसे पूजा-1 (बीएनएस-1) नाम दिया गया है। यह जल्द तैयार होने के साथ अपेक्षाकृत अधिक उपज देगी। विश्वविद्यालय के मुख्य वैज्ञानिक (तेलहन) डॉ सोहन राम और उनकी टीम की 12 साल की मेहनत यह फल है।ड्ढr डॉ राम के मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर प्रति हेक्टेयर इसकी औसत उपज छह से सात क्िवंटल और अधिकतम उपज क्षमता दस से 11 क्िवंटल है। वर्तमान की अन्य राष्ट्रीय और स्थानीय किस्मों की अपेक्षा इसकी उपज आठ से 16 प्रतिशत अधिक है। इसमें तेल की मात्रा 35.82 प्रतिशत पायी गयी है। इसके एक हाार बीज का वजन 4.5 ग्राम आंका गया है। यह दिन में तैयार हो जाती है। तिल और रामतिल को-ऑर्डिनेटेड प्रोजेक्ट में इसका प्रवेश वर्ष 2004 में हुआ था। झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, केरल और पश्चिम बंगाल के 4विभिन्न केंद्रों पर वर्ष 2007 तक लगातार इसका परीक्षण हुआ। डॉ राम ने बताया कि विश्वविद्यालय में वर्ष 1में शोध करने के बाद 1में केंद्र प्रभेद परीक्षण में इसका चयन हुआ। वर्ष 2004 तक लगातार इसका परीक्षण हुआ।ड्ढr नागपुर के पंजाब राव देशमुख कृषि विद्यापीठ में प्रभेद पहचान समिति की चार मई को हुई बैठक में इसकी अनुशंसा हुई। आइसीएआर के डीडीाी (क्रॉप साइंस) डॉ पीएल गौतम ने इसकी अध्यक्षता की थी। वीसी डॉ एनएन सिंह ने भी उन्हें काफी प्रोत्साहित किया था।

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