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आँधी से बागवानों के सपने चूर

ाकोरी के सराय प्रमराज गाँव के मतीन का निर्माणाधीन मकान इस बार पूरा नहीं हो पाएगा। क्योंकि उनके बाग के 40 फीसदी आम बुधवार के अंधड़ में गिर गया। शेखपुरवा गाँव के अच्छन मियाँ की भी कमोबेश यही हालत है। सुबह अपने बाग से ट्राली भर अमिया लेकर जब वे दुबग्गा मण्डी पहुँचे तो उनके चेहर के रंग उड़ा हुआ था। अपने दोस्त नईम से कह रहे थे कि इस बार जब अच्छी फसल देखी तो इसे बचाने के लिए बागों में महँगी दवा छिड़कवाई थी। आँधी तो काल बनकर आई। सार सपने चकनाचूर हो गए। अच्छन मियाँ जरदोजी का भी काम करते हैं और आम के सीजन के बाद मुम्बई में इसका व्यापार करते हैं। मण्डी में इन्हें टूटे आम की वाजिब कीमत भी बिचौलियों की कमीशनखोरी के चलते नहीं मिल सकी।ड्ढr आँधी से सिर्फ मतीन और अच्छन ही नहीं कटौली के फूलचन्द, कसमण्डी के नवाब हसन व इसरार समेत सैकड़ों बागवानों के सपने अंधड़ में चकनाचूर हो गए। किसी के बाग का आधा आम गिर गया तो किसी का 60 फीसदी तक आम जमीं पर बिछ गया। बागों में गिरी अमियाँ चुनकर ये बागवान गुरुवार की सुबह दुबग्गा मण्डी पहुँचे लेकिन आमों की जो यहाँ कीमत लगी वह उनके लिए बड़ा झटका था। बिचौलियों ने आकार के अनुसार किसी का आम पाँच रुपए पसेरी तो किसी को आठ से नौ रुपए पसेरी बिकवा दिया।ड्ढr अहम बात यह है कि यही आम राजधानी के बाजारों में कहीं दस रुपए के डेढ़-दो किलो तो कहीं-कहीं तो दस रुपए किलो तक बिक रहे थे। दुबग्गा मण्डी के आढ़ती मो. शाहरुख का तो कहना है कि तड़के तो मण्डी में आमों के खरीद का नजारा ही कुछ और था। दूसर जिले के व्यापारी सौ से दो सौ रुपए कुंतल तक आम खरीद कर ले जा चुके हैं। वे कहते हैं अन्दरूनी बागों से तो दोपहर बाद आम पहुँचना शुरू हुआ,शुक्रवार को और अधिक आम मण्डी पहँुचेगा।

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