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सेना बुलाए तो आज ही क्रिकेट छोड़ दूं: गंभीर

गौतम गंभीर की गिनती अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सबसे आक्रामक सलामी बल्लेबाजों में होने लगी है। अगर वह क्रीा पर हों तो दुनिया भर के गेंदबाजों के छक्के छूट जाते हैं। लेकिन देश में बढ़ता आतंकवाद उन्हें परेशान करता है। खासकर तब जब इससे खेल आयोजन पर संकट आता है। गंभीर सेना के प्रति इतनी दीवानगी रखते हैं कि, अगर मौका मिले तो वह तुरंत क्रिकेट को अलविदा कहकर सेना में शामिल होने को तैयार हैं। सेना के प्रति अपने लगाव और सम्मान पर चर्चा करते हुए गंभीर के चेहर की चमक देखने लायक थी। उन्होंने दमदार शब्दों में कहा,‘सेना के लिए मैं क्रिकेट को भी छोड़ सकता हूं। वैसे तो अब देर हो चुकी है, लेकिन अगर ऑफर मिले तो एकदम से क्रिकेट छोड़ सेना में शामिल हो सकता हूं।’ यही नहीं, गौतम को यह कहने में भी कोई गुरा नहीं कि, ‘मैं सेना से जुड़े लोगों से ज्यादा किसी का सम्मान नहीं करता।’ 27 साल के दिल्लीवासी गंभीर दुनिया भर में बढ़ते आतंकवाद का असर खेल प्रतियोगिताओं में पड़ने से भी खिन्न हैं। उन्होंने कहा,‘आतंकवाद की वजह से जो हो रहा है, वह शर्मनाक है। इससे मुझे दुख होता है। आतंकवादियों को खेल आयोजनों से दूर रहना चाहिए। क्योंकि खेल तोड़ने का नहीं जोड़ने का काम करता है।’ गौतम की सोच आजकल के नौजवानों से एकदम अलग ही है। उनका आदर्श व्यक्ित कोई क्रिकेटर या अन्य खिलाड़ी नहीं बल्कि शहीद भगत सिंह हैं। गौतम ने कहा,‘क्रिकेट में मेरा कोई आदर्श नहीं है, मेर आदर्श बचपन से ही भगत सिंह रहे हैं। मैं बचपन से उनकी फिल्में देखकर और उनके बार में किताबों में पढ़कर बढ़ा हुआ हैं। मैं उन्हीं से देश के लिए कुछ कर गुजरने की प्रेरणा लेता हूं। भगत सिंह ने देश को आजादी दिलाने के लिए अपनी जान दी, इसी वजह से हम स्वतंत्रता का मजा ले रहे हैं। मेर लिए वह बहुत बड़ी शख्सियत हैं।’

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