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केन्दु पती की नहीं हो पा रही छटांई

झारखंड राज्य वन विकास निगम में केंदु पत्ता की कापिसिंग (छंटाई) के मामले में वन विभाग के अंदर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग इसमें अनियमितता मान रहे हैं, वहीं एमडी ने कहा है कि कापिसिंग वैध तरीके से हो रही है। इस मामले में वन मंत्री सुधीर महतो ने प्रबंध निदेशक से जवाब-तलब किया है।ड्ढr निगम ने केंदु पत्ता की कापिसिंग के लिए 51 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया है। पिछले दस वर्ष में ऐसा पहली बार हुआ है। पहले यह काम ठेकेदार कराते थे। केंदु पत्ता की बिक्री के लिए दिसंबर में टेंडर होता है। इसके बाद जनवरी-फरवरी में इसकी कापिसिंग होती है। केंदु पत्ता का संग्रहण 20 अप्रैल से शुरू होता है और मई के अंत तक चलता है। वन विभाग के कुछ अफसरों का कहना है कि जिस इलाके का लॉट नहीं बिकता है, उसकी कापिसिंग नहीं होती है। पत्ता यू ही छोड़ दिया जाता है। लेकिन इस बार रांची, खूंटी, तमाड़, हाट गम्हरिया, नोवामुंडी, केरा, खरसांवा, सोगड़ा, मांडू, गांवा, डोमचांच, देवघर एवं हिाला की कई इकाईयों में केंदु पत्ता की खरीदारी नहीं हुई। फिर भी कापिसिंग के लिए लाखों रुपये आवंटित कर दिये।ड्ढr कापिसिंग वैध है: एमडीड्ढr राज्य वन विकास निगम के एमडी यूआर विश्वास का कहना है कि अनसोल्ड लॉट की कापिसिंग कराना वैध है। ऐसा कोई नियम नहीं है कि जो नहीं बिका उसकी छंटाई नहीं की जाये। निगम अनसोल्ड लॉट को बेचने की कोशिश में लगा है।

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