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प्रधान सचिव ने संचिका तलब की

गलत बहाली के आरोप में बर्खास्त सात व्याख्याताओं को राज्य के विभिन्न अभियंत्रण महाविद्यालयों में बिहार सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा पिछले दरवाजे से अधिसूचना जारी कर पदस्थापित करने के मामले की जांच होगी। विभाग के प्रधान सचिव आलोक वर्धन चतुव्रेदी ने बताया कि उन्होंने इससे संबंधित संचिका मांगी है। उन्होंने कहा कि इस मामले कि पूरी छानबीन की जाएगी। गौरतलब है कि विभाग के संयुक्त सचिव सतीश नारायण ने अपनी सेवानिवृति के कुछ दिन पूर्व ही यह अधिसूचना निकाली।ड्ढr ड्ढr ‘हिन्दुस्तान’ ने गुरुवार को यह खुलासा किया था कि राजपत्रित पदाधिकारियों की नियुक्ित, जिस श्रेणी में यह व्याख्याता आते हैं कि नियुक्ित के लिए बीपीएससी की अनुशंसाा, वित्त विभाग की सहमति और कैबिनेट की मंजूरी जरूरी होती है पर इस मामले में इसकी भी जरूरत नहीं समझी गई। इसके अलावा इस नियुक्ित के लिए न तो कोई विज्ञापन निकाला गया और न ही साक्षात्कार के आधार पर इन्हें कोई नियुक्ित-पत्र जारी हुआ। इधर इस गंभीर मामले का खुलासा होने के बाद गुरुवार को विश्वेसरैया भवन परिसर में स्थित विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के दफ्तर में खलबली मची रही। चर्चा थी कि इन बर्खास्त वयाख्याताओं के पदस्थापना के लिए एक बड़ी डिलिंग हुई है। इधर इस मामले में पूछे जाने पर विभागीय मंत्री शाहिद अली खां ने कहा कि पदभार ग्रहण करने के बाद वह महा तीन दिन ही कार्यालय में बैठ पाए हैं। उसके बाद से वह लगातार सीतामढ़ी में हैं। उन्हें इस मामले कि कोई जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि पटना आने पर वह विभागीय सचिव से इस संदर्भ में बात करंगे और जो भी विधिसम्मत होगा वैसी कार्रवाई की जाएगी।

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