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झारखंड बंद का मिलाजुला रहा असर

पोलित ब्यूरो सदस्य प्रमोद मिश्र की गिरफ्तारी के विरोध में आहूत झारखंड-बिहार बंद का इस सूबे में मिलाजुला असर पड़ा है। कहीं से किसी हिंसक या अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। बिहार में नक्सलियों ने घटना को जरुर अंजाम दिया है, लेकिन पहली बार झारखंड में नक्सली नाकाम रहे।ड्ढr चतरा में तो पुलिस ने नक्सलियों में मांद में जाकर मुठभेड़ किया है। सभी नक्सली बंद को सफल बनाने की योजना तैयार कर रहे थे कि पुलिस जा धमकी और सात नक्सलियों को दबोच लिया और तीन राइफल भी बरामद कर ली। उग्रवादग्रस्त इलाकों में ट्रन सेवा बाधित रही। रलवे प्रशासन ने पहले ही रुट बदल दिया था। इस बंदी का कोयला उत्पादक क्षेत्रों में असर पड़ा है। कर्मचारियों की उपस्थिति भी कम रही और कोयले का परिवहन भी लगभग ठप रहा। स्कूल और दूसर सरकारी प्रतिष्ठान सामान्य दिनों की तरह खले रहे।ड्ढr डीजीपी वीडी राम ने नक्सलियों की इस बंदी को विफल बताया है। उन्होंने कहा कि पुलिस की उपस्थिति के कारण जन जीवन प्रभावित नहीं हो पाया। लंबी दूसरी की गाड़ियां नहीं चलीं। जीटी रोड पर सामान्य दिनों की तरह आवागमन हुआ।ड्ढr रांची से पटना जाने वाले मार्गपर इस बंदी का असर देखा गया। रांची से पलामू की सड़कें विरान थीं। उग्रवादग्रस्त पलामू, गढ़वा, लातेहार, सिमडेगा, चतरा, चाईबासा, जमशेदपुर, हजारीबाग, गिरिडीह, कोडरमा, बोकारो, धनबाद के शहरी इलाकों में जनजीवन सामान्य रहा, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में यातायात प्रभावित हुआ और बाजार बंद रहे। यही स्थिति रांची की भी रही। इस बंदी का संथालपरगना इलाके में कोई असर नहीं पड़ा है। सरकारी, गैर सरकारी और केंद्रीय प्रतिष्ठान पूर राज्य में खुले रहे।

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