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8 सड़कों के टेंडर पर मुश्किलें यथावत

पटना रोड प्रोजेक्ट की चुनौती को पथ निर्माण विभाग ने साकार करना शुरू कर दिया है। आठ मुख्य सड़कों का टेन्डर कर दिया गया है और तीन महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण की जिम्मेवारी पुल निर्माण निगम को सौंप दी गई है। इधर, गुरुवार को तांतिया कन्स्ट्रक्शन ने पटना हाईकोर्ट में दायर रिट याचिका को वापस लेने की गुहार मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ से की है। पर पुल निर्माण निगम को कंकड़बाग रोड (ओल्ड बायपास) में कई परशानियों का सामना करना पड़ रहा है।ड्ढr ड्ढr सड़क के दायर में आने वाले नौ ट्रांसफार्मरों को हटाने के लिए बिजली बोर्ड के अधिकारियों से आग्रह किया गया है। पेसू के अभियंताओं ने पुल निर्माण निगम से इसके लिए सात दिन का समय मांगा है। इसके अतिरिक्त कई बिजली पोलों को हटाने की कार्रवाई भी की जा रही है। सबसे अधिक मुसीबत है सड़क पर बने धार्मिक स्थलों को हटाने की। विभागीय अधिकारियों की माने तो मन्दिर के ट्रस्टी को मंदिर हटाने के एवज में पैसा या जमीन देने की बाबत गंभीरता सेड्ढr विचार किया जा रहा है। इन सभी बाधाओं को हटाने के साथ ही 30 जून तक सड़क निर्माण पूरा करने की चुनौती है। इस संदर्भ में पुल निर्माण निगम के अधिकारियों का कहना है कि कंकड़बाग रोड की अपेक्षा बोरिंग रोड और बोरिंग केनाल रोड पर कम बाधाएं हैं। वहीं अन्य पांच महत्वपूर्ण सड़कों-वीरचन्द पटेल पथ, राजेन्द्र पथ, बुद्ध मार्ग, बांकीपुर-दानापुर पथ और आशियाना-दीघा पथ को 15 जून तक बनाने के लिए टेंडर किया गया है जिसमें एजेंसी का चयन 1मई तक होना है। साथ ही बेली रोड (जगदेव पथ मोड़ से सगुना मोड़ तक), बांकीपुर- दानापुर पथ और दानापुर-खगौल पथ के निर्माण के लिए लिए नौ से 12 महीने की अवधि तय की गई है। इन सड़कों के निर्माण के लिए एजेंसियो का चयन 20 मई को होगा।ड्ढr ड्ढr दूसरी ओर तांतिया कन्स्ट्रक्शन ने पटना हाईकोर्ट में दायर रिट याचिका को वापस लेने की गुहार मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ से की है। गुरुवार को तांतिया के वकील सूरा समदर्शी ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेन्द्रमल लोढ़ा तथा न्यायमूर्ति चन्द्रमौली कुमार प्रसाद की खंडपीठ से रिट याचिका को किसी जज के समक्ष सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया है ताकि उसे वापस लिया जा सके। अदालत ने श्री समदर्शी के अनुरोध को मंजूर कर लिया। विदित है कि राज्य सरकार द्वारा तांतिया कन्स्ट्रक्शन से काम वापस लेने के खिलाफ कम्पनी की ओर से एक रिट याचिका हाईकोर्ट में दायर की गई थी। कम्पनी की रिट याचिका सुनवाई के लिए न्यायमूर्ति नवनीति प्रसाद सिंह की एकलपीठ के समक्ष पेश की गई। न्यायमूर्ति श्री सिंह ने अपनी नाराजगी जताते हुए मामले पर सुनवाई से इंकार कर उसे मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया था।

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