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विकचचास केचच बिना बाजार उदारीकचचरण नही

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री कमलनाथ ने विकसित देशों को आगाह किया है कि विश्व व्यापार समझौते की बातचीत में जब तक पिछड़े और गरीब देशों को विकास के अवसरों का भरोसा नहीं मिलता, व्यापार वार्ता कामयाब नहीं होगी। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि विश्व व्यापार संगठन की दोहा दौर की वार्ता को विकसित देशों के माल के लिए विकासशील देशों के बाजार खुलवाने का उपक्रम नहीं बनने देगा। कमलनाथ ने यह बात ऐसे समय की है जबकि डब्ल्यूटीओ के महानिदेशक पास्कल लेमी ने कहा है कि इस वर्ष के अंत तक नया व्यापार समझौता हो सकता है। कमलनाथ ने शुक्रवार को जारी एक बयान में माना कि व्यापार वार्ता इस समय नाजुक दौर में है पर उन्होंने आगाह किया कि इसकी सफलता कई अहम मुद्दों पर टिकी है। उन्होंने कहा कि भारत के सबसे पहली चिंता है अपने किसानों और गरीबों की आजीविका की सुरक्षा करना। उसके बाद ही देश दूसरी किसी बात पर विचार करेगा। उल्लेखनीय है कि भारत अपने यहां कृषि पर बड़ी आबादी के आश्रय की दुहाई देते हुए अपने कृषि बाजार को विदेशी बाजार के जोखिमों से बचाने के लिए पर्याप्त रूप से संरक्षित रखने का अधिकार चाहता है। साथ साथ उसकी मांग है कि विकसित देशों में किसानों की मिलने वाली भारी सरकारी सहायता में बड़ी कटौती की जाए क्योंकि इसका असर भारत जैसे देशों के किसानों की व्यापार क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है।

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