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मरीचा की जान जरूरी है या दवा की कीमत: भासा

डाक्टरों ने सूबे की नौकरशाही के भ्रष्टाचार की गंगोत्री में डूबा होने का आरोप लगाया है। डायनेमिक एसीपी समेत अपनी चिरलम्बित मांगों को पूरा नहीं होता देख डाक्टरों ने नौकरशाही के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली से खफा बिहार राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) ने स्वास्थ्य मंत्री नन्दकिशोर यादव से वार्ता के लिए शीघ्र समय देने का अनुरोध किया है। भासा ने कहा है कि सूबे के नौकरशाह खुद भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं और डाक्टरों को बदनाम कर रहे हैं।ड्ढr ड्ढr मगध प्रमंडल के आयुक्त केपी रमैय्या की करतूत से पूरा राज्य अवगत है, पर वे अपनी कमी छुपाने के लिए सिविल सर्जन पर आरोप मढ़ रहे हैं। दानापुर अस्पताल में डाक्टर ने मरीज की जान बचाने की कोशिश में ब्रांडेड दवा लिख दी तो उनकी वेतनवृद्धि रोक दी गई। मरीज की जान जरूरी है या दवा की कीमत? सरकार पहले यह तय कर। भासा के प्रदेश अध्यक्ष डा. रामनगीना सिंह, सचिव डा. दिनेश्वर सिंह, संयोजक डा. अजय कुमार, सह संयोजक डा. कांतिमोहन सिह, डा. रामरखा, संयुक्त सचिव डा. सुनील कुमार और डा. कुमार अरुण ने कहा कि 18 मई को संघ की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में नौकरशाही के खिलाफ कड़े निर्णय लिये जाएंगे। राज्य स्वास्थ्य समिति के क्रियाकलापों की समीक्षा भी की जाएगी। बैठक में सभी सिविल सर्जन, मेडिकल कॉलेज के टीचर प्रतिनिधि, आईएमए एवं भासा के प्रदेश पदाधिकारियों की पूरी टीम शामिल होगी। वैसे भी स्वास्थ्य विभाग एवं वित्त विभाग के रवैये के खिलाफ सूबे के डाक्टरों ने भासा के नेतृत्व पर आंदोलन करने का दबाव बढ़ा दिया है। नये स्वास्थ्य मंत्री ने सकारात्मक रुख नहीं अपनाया तो आर-पार की लड़ाई के अलावा दूसरा कोई रास्ता भी नहीं बचेगा।

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