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अब तक 522 बाल श्रमिक लौटे

बिहार से बाहर गए बाल श्रमिकों की घर वापसी के लिए बिहार का अभियान रंग लाने लगा है। जनवरी 2006 से अबतक 522 बाल श्रमिकों को घर लाया जा चुका है। दिल्ली के सहयोग से बिहार पहुंचे ये बच्चे अब अपने घरों में हैं। बिहार द्वारा बाल श्रमिकों की घर वापसी अभियान चलाए जाने की केन्द्र ने भी तारीफ की है। श्रम व रोजगार मंत्रालय की सचिव सुधा पिल्लई ने इस अभियान में दिल्ली और बिहार के बेहतर तालमेल की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने ‘नेशनल कमीशन ऑन प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट (एनसीपीसीआर)’ और ‘चाइल्ड वेलफेयर कमिटी (सीडब्ल्यूसी) के अलावा बिहार के रजिडेन्ट कमिश्नर के साथ बैठक में बिहार और दिल्ली के समन्वय को काफी सराहा और अन्य राज्यों को उससे सीखने की नसीहत भी दी। उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल सरीखे राज्यों को तो इसके अनुपालन की भी सलाह दी।ड्ढr ड्ढr दिल्ली के बिहार भवन में बना ‘लेबर सेल’ बाल श्रमिकों की हर तरह से मदद करता है। बाल श्रमिकों की सूचना मिलने के बाद उसके लिए सभी व्यवस्था की जाती है। बिहार के श्रमायुक्त को सूचना देते हुए उन्हें सुरक्षा व्यवस्था में पटना भेजा जाता है। इस मसले पर पटना के अलावा बच्चों के घर से सम्बद्ध जिलाधिकारियों से भी समन्वय स्थापित किया जाता है। बिहार सरकार ने मुक्त बाल श्रमिकों को आवासीय विद्यालय में नि:शुल्क पढ़ाने और भोजन की व्यवस्था भी की है जबकि उनके परिवार के सदस्यों को राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अलावा अन्य योजनाओं में रोजगार देने का भी प्रावधान किया गया है।

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