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13 जुलाई, 2020|8:30|IST

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सर्वसम्मत प्रस्ताव से सदन ने नीतीश को बुलाया

बिहार विधान परिषद के सौ वर्षो से अधिक के इतिहास में यह भी एक नई घटना थी। सर्वदलीय बैठक के बाद 11 बजे शुरू हुई कार्यवाही के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सदन में मौजूद नहीं थे। गुरुवार को नेता प्रतिपक्ष सुशील कुमार मोदी द्वारा लगाए गए आरोप से वह मर्माहत थे। उन्होंने सदन में गुरुवार को ही दूसरी पाली में अपनी पीडम इजहार कर सभापति से न्याय की अपील की थी।

शुक्रवार को सदन की कार्यवाही शुरु होते ही सभापति अवधेश नारायण सिंह ने नियमन दिया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने गुरुवार को हुई घटना में उकसाने का नहीं बल्कि शांत करने का प्रयास किया। घटना के बाद भी मैंने यही कहा था और आज भी उस पर कायम हूं। सभापति होने के नाते मैं घटना की जिम्मेवारी लेता हूं।

प्रतिपक्ष के नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा कि मैं सभापति के नियमन का सम्मान करता हूं और नीतीश कुमार पर लगाए आरोप को वापस लेता हूं। इसके बाद सभापति ने नीतीश कुमार को सदन में आमंत्रित करने का प्रस्ताव रखा, जिसे सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया। 

प्रस्ताव पारित होने के बाद मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी स्वयं सदन के बाहर निकल गए। किसी को यह भान भी नहीं हुआ कि वह श्री कुमार को आमंत्रित करने जा रहे हैं। लगभग दो मिनट बाद ही मुख्यमंत्री सदन में वापस लौटे तो उनके साथ पूर्व मुख्यमंत्री श्री कुमार ने भी प्रवेश किया। नीतीश कुमार के सदन में प्रवेश करते ही सभी दल के सदस्यों ने मेजें थपथपाकर उनका स्वागत किया।

पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का मैं सम्मान करता हूं। उनसे हमारा संबंध 40 वर्ष पुराना है। सात साल तक तो उनके साथ उप मुख्यमंत्री के रूप में काम कर चुका हूं। मेरे द्वारा उनपर जो आरोप लगाया गया है, उसे मैं वापस लेता हूं।
सुशील कुमार मोदी, नेता प्रतिपक्ष विधान परिषद

नीतीश कुमार सहित मैं अबतक सात मुख्यमंत्रियों के साथ काम कर चुका हूं। लेकिन श्री कुमार जैसा विजन मैंने किसी में नहीं देखा। मैने उन्हें पढ़ा है, लेकिन अभी भी लगता है और पढम्ना होगा। सचमुच वह श्रद्धा के लायक हैं। विरोधी भी उनकी खूबियों के कायल हैं।
जीतनराम मांझी, मुख्यमंत्री

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