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1 जून, 2020|12:03|IST

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अच्छी होगी परवरिश नहीं बिगड़ेगा बच्चा

बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं। उन्हें जैसा रूप देना चाहें, दे सकते हैं। उनके अच्छे भविष्य और उन्हें बेहतर इंसान बनाने के लिए सही परवरिश जरूरी है। बच्चे के साथ आपका व्यवहार कैसा हो ताकि वो नटखट तो बनें पर बिगड़े बच्चे नहीं, बता रही हैं वंदना

हर बच्चा अलग होता है। उन्हें पालने का तरीका अलग होता है। बच्चों की सही परवरिश के लिए हालात के मुताबिक परवरिश की जरूरत होती है। सवाल यह है कि बच्चे के साथ कैसे पेश आएं कि वह अनुशासन में रहे और लोग उसकी शैतानियों की शिकायत लेकर आपके पास न आएं।

कैसे तय करें सीमाएं
बच्चों को यह पता होना चाहिए कि उन्हें किस चीज की अनुमति है और किस चीज की नहीं। बेहतर परवरिश के लिए यह सबसे ज्यादा जरूरी कदम है, क्योंकि सीमाएं हमें हमारा दायरा बताती हैं। बच्चों को यह पता होना चाहिए कि उन्हें कितनी देर के लिए खेलने की इजाजत है।
वे कितना फास्टफूड खा सकते हैं या कंप्यूटर और टीवी पर कितनी देर गेम खेल सकते हैं आदि। पर सीमाएं हमेशा सोच-समझकर ही तय करें।

सीमाओं पर कैसे रहें अडिग
एक का मतलब एक। बच्चों को ऐसा कहने के बाद ज्यादातर लोगों के दिमाग में यह बात आती है कि आज अगर एक और बिस्कुट खा ही लेगा तो सेहत पर क्या फर्क पड़ जाएगा? लेकिन बात एक या दो दिन की नहीं है। एक बार सीमाएं लांघने की अनुमति देकर आप उन्हें ऐसा हमेशा करने के लिए प्रेरित करती हैं। बच्चे यह सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि मां-पापा कभी पूरा पैकेट खाने देते हैं, पर कभी-कभार सिर्फ एक। इसकी वजह से बच्चों में झुंझलाहट और चिड़चिड़ापन आ सकता है। उनमें असंतोष की भावना आ सकती है। इसलिए तय की गई सीमाओं पर अडिग रहें, ताकि कहीं संदेह न हो।  
बच्चा जब जिद करे तो क्या करें
बच्चों की जिद के आगे हम अक्सर हथियार डाल देते हैं। लेकिन एक बात याद रखें कि एक बार यदि आपने उनकी जिद के आगे हार मान ली तो हमेशा ऐसा ही होगा। परोक्ष रूप से आपने उन्हें रास्ता बता दिया। इसलिए बच्चों की जिद पूरी न करें। इसका सबसे अच्छा तरीका यह हो सकता है कि बच्चे जब जिद करें तो उन्हें पूरी तरह नजर अंदाज करें। कुछ देर जिद करने के बाद बच्चों को यह एहसास होगा कि जिद करने का कोई फायदा नहीं है, सिर्फ समय की बर्बादी है।

जब फैसला न कर पाएं तो क्या करें
बच्चा किसी चीज के लिए पूछे और आप उलझन में हैं कि हां कहूं या ना, तो बच्चे से उसकी वजह पूछें। मसलन, यदि आपका बच्चा डीवीडी या टीवी पर कोई फिल्म देखना चाहता है तो उसके लिए उससे कारण पूछें। बच्चों के यह कहने पर कि उसने अपने सारे खिलौनों को साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखा है, तो उसे डीवीडी या फिल्म देखने दें।

बिगड़े बच्चों की निशानियां
’  बच्चे को जरूरत से ज्यादा गुस्सा आए या गुस्से में तोड़फोड़ करे।
’  वह घर के किसी भी सदस्य की बात न माने और अपनी मर्जी से ही  काम करे।
’  आपको बच्चे पर इतना गुस्सा आए कि उसकी पिटाई करने का दिल करे।
’  जब बच्चा देर रात जागने लगे और दिन में उसे नींद आए।
’  उसकी हर जिद पूरी करने के अलावा आपके पास कोई चारा नहीं बचता।
’  अपनी बात मनवाने के लिए वह आपको तरह-तरह से ब्लैकमेल करने लगे।
’  स्कूल और मोहल्ले के लोग अक्सर उसकी शैतानियों की शिकायत लेकर आपके पास आने लगें।
’  उसकी हरकतों के कारण पारिवारिक कार्यक्रमों में जाना आपने कम कर दिया हो।

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