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पहले दें योजनाओं का लाभ तब पिलाइए पोलियो की बूंद

‘न खाये के ठीक न रहे के,इ पर से हर महिना में डब्बा लेकर बच्चा के दवा पिलावे चल आव ल। पहिले सरकार के कह की उ खाये के लिए अनाज और रहे के लेल इंदिरा आवास दे तब बच्चा के दवा पिलायेंगे।’ मुशहरी के जमालाबाद के सहनी टोला के कुछ पुरूष और महिलाओं ने बातचीत के क्रम में जब यह बात कही तो यूनिसेफ, डब्लूएचओ समेत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी दंग रह गए। पोलियो अभियान के दौरान कुछ इसी अंदाज में वैक्सीनेटर के सामने आम लोग बच्चों को दवा पिलाने के लिए शर्त रख रहे है।ड्ढr ड्ढr हद तो तब हो गयी जब इसमें कुछ एक पिछड़े समुदाय के महिला पुरूष बाढ़ राहत की मांग कर बैठे। कांटी के दामोपुर वासी मो. इसरायल (काल्पनिक नाम) ने तो यहां तक कह दिया कि रोड नाला बनाओ और चापाकाल लगवाओ तो तभी अपने बच्चे को दवा पिलाने देंगे। इसी तरह मुशहरी के मनिका गांव की कुछ महिलाओं ने वैक्सीनेटर, सुपरवाईार को यह कह कर खदेड़ दिया कि पेट में दाना नहीं है चले आते है दवा पिलाने। मीनापुर के दो गांव में एक खास समुदाय के लोगों ने यहां तक कह दिया कि जनसंख्या रोकने के लिए बंध्याकरण की दवा पिला रहा( राष्ट्रीय कार्यक्रम के प्रति लोगों की इस उदासीनता से स्वास्थ्य एवं सामान्य प्रशासन के अधिकारी दंग है।ड्ढr ड्ढr यूनिसेफ की रिपोर्ट पर यकीन करं तो पोलियो अभियान के क्रम में केन्द्र और राज्य सरकार की जनकल्याण योजनाओं के सही से लागू नहीं होने पर आम लोग अब मुख्यमंत्री और डीएम के जनता दरबार में फरियाद करने के बाजाए पोलियो वैक्सीनेटर से तर्क कर रहे है। इसको यूनिसेफ के राज्य प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ.गोपाल कृष्ण भी स्वीकार कर रहे है। उन्होंनो बताया कि अभियान के दौरान इस तरह की शिकायत उत्तर बिहार से सबसे अधिक मिल रही है। इसका मूल कारण अशिक्षा है। इधर जिलें में इस तरह की घटना को सीएस डॉ. धर्मदेव सिंह भी स्वीकार कर रहे है।ड्ढr उन्होंने बताया कि प्रखंडों में कम शहर में सबसे अधिक रिफीयूज्ल के मामलें सामने आते है। पढ़े लिखे लोग भी बच्चों को दवा नहीं देते। हालांकि इनका तर्क यह होता है कि वे अपने प्राईवेट डॉक्टर से बच्चों को दवा पिलवा चुके है।ड्ढr शहरी क्षेत्र में वर्षो से बच्चों को दवा पिला रहे वैक्सीनेटर चंदन कुमार ने बताया कि शहर के वीआईपी एवं झुग्गी झोपड़ी इलाकों में सबसे अधिक इस तरह शिकायत मिल रही है। यूनिसेफ के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार पिछले दो पोलियो राउंड में शहर के पक्की सराय के सराय भवन,मुशहरी, कांटी, मोतीपुर,सकरा, कुढ़नी में एक दर्जन से अधिक गांवों में इस तरह से इंकार करने की शिकायत मिली है। धर्म गुरू एवं जनप्रतिनिधियों के माध्यम से इसके प्रति जागरूक ता पर लाखों राशि खर्च होने के बाद लोगों पर इसका प्रभाव नहीं पर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार इस तरह के लोगों को समझाकर इनके बच्चे को दवा तो दी जाती है। लेकिन अभियान के प्रति लोगों की यह प्रवृति अच्छी नहीं है।

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