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आठ साल में गिने-चुने को मिला प्रोमोशन

पथ निर्माण विभाग में प्रोमोशन का मामला गंभीर होता जा रहा है। प्रमोशन नहीं मिलने की स्थिति में पथ, भवन तथा आरइओ में कार्यकारी व्यवस्था के तहत इंजीनियरों को ऊपर के पदों पर बैठाया जा रहा है। प्रमोशन दिये जाने की कार्रवाई वर्षो से चल रही है, लेकिन इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। भवन-आरइओ का पैतृक विभाग पथ निर्माण है। लिहाजा प्रोमोशन यहीं से होना है। आठ साल में सिर्फ एक, वर्तमान में इंजीनियर इन चीफ एफएम टोप्पो को रगुलर चीफ इंजीनियर के रूप में प्रोमोशन दिया गया है।ड्ढr एसइ के रूप में अमरंद्र कुमार को कोर्ट के आदेश पर प्रोन्नति दी गयी। कोर्ट जाकर और दो लोगों ने सरकार से प्रमोशन लिया। सीआर जमा करने के मामले में इंजीनियर गंभीर नहीं हैं। टाइम पर कुंडली जमा करने से कन्नी काटते हैं। निगरानी ब्यूरो से समय पर इंजीनियरों का विजिलेंस क्लीयरंस भी नहीं मिलता। विभाग क्लीयरेंस के लिए लगातार पत्र भेजता है, लेकिन जानकारी नहीं मिल रही।ड्ढr प्रोमोशन के लिए सेवा संपुष्टि, सीआर तथा विजिलेंस क्लीयरंस जरूरी है। सेवा संपुष्टि के लिए विभागीय परीक्षा पास होना जरूरी है। आठ साल में एक बार भी विभागीय परीक्षा नहीं हुई है। अंदर की बात यह भी कि सत्ता शीर्ष और ऊपर के पदों पर बैठे अफसर रगुलर प्रमोशन का शॉर्टेज बनाये रखना चाहते हैं। जिसे चाहो कार्यकारी व्यवस्था के तहत मनचाही जगह पर बिठाओ। यही कारण है कि चीफ इंजीनियर की कुर्सी पर बैठे रगुलर इइ बोल्ड होकर नियम-कानून से काम करने की हिम्मत नहीं रखते।ं

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