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प्रभु कृपालु हैं, दुख हर लेते हैं : पीयूष जी

ईश्वर बड़े कृपालु होते हैं। इंसान के सभी प्रकार के दुख हर लेते हैं। प्रभु के स्मरण से संकट दूर हो जाते हैं। उक्त बातें पीयूष जी महाराज ने 16 मई को अग्रसेन भवन में कही। वह श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन उपस्थित भक्तों के बीच कथा का प्रसाद बांट रहे थे। पीयूष जी ने कहा कि प्रीत की डोर मजबूत होती है। इसका बंधन कमजोर नहीं होता। उन्होंने भगवान कृष्ण के मथुरा गम की कथा पर प्रकाश डाला। भक्तों के वियोग की चर्चा करते हुए कहा कि जहां शब्द मौन हो जाते हैं, वहां आंसू अपनी भाषा प्रकट करते हैं। उन्होंने रूक्मणि विवाह का वर्णन किया। प्रसंगानुसार भजन भी प्रस्तुत किये। सात दिनी कथा का समापन 17 मई को होगा। यजमान की भूमिका में किशोरी लाल चौधरी उपस्थित थे। आयोजन स्थल पर भगवान कृष्ण की बाल लीला के चित्र सजाये गये हैं।

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