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यूजीसी के ग्रांट का फायदा उठाएं

आजतक तक कुआं प्यासे के पास नहीं आया है, लेकिन इस बार कुआं सचमुच प्यासे के पास आया है। कुआं से प्यास कैसे बुझानी है ये आप लोगों को सेाचना होगा। आपके कॉलेजों में किन-किन संसाधनों की कमी है आपको बताना है। यह मौका आप गवाएं नहीं। ये बातें शनिवार को यूजीसी की 11वीं योजना के अन्तर्गत मिलने वाले ग्रांट को लेकर प्राचार्यो को संबोधित करते हुए पटना विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहीं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा सभी कॉलेजों को ग्रांट दिया जाएगा। ये पहल खुद यूजीसी ने की है। इसीलिए आप उस ग्रांट का फायदा उठाएं। कॉलेजों में क्या-क्या कमियां हैं उसका आपको विस्तृत ब्योरा देना होगा। कार्यशाला में प्राचार्यो को एक फार्मेट दिया गया जिसमें कॉलेज के कुल पक्के कमरों की संख्या, कच्चे कमरों की संख्या, स्नातक स्तर पर नामांकित कुछ छात्र-डात्राओं की संख्या, इंटरमीडिएट स्तर पर छात्र-छात्राओं की संख्या, महाविद्यालय की जमीन का कुल रकबा, कितनी जमीन पर भवन बना है? कॉलेज में लाइब्रेरी है या नहीं, की जानकरी प्राचार्यो से मांगी गयी। कार्यशाला में 250 अंगीभूत कॉलेजों के प्राचार्यो ने भाग लिया। मगध विवि में 25 मई को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की टीम आने वाली है। यूजीसी सभी कॉलेज को उसकी योग्यता के अनुसार अनुदान देगी। इस मौके पर पटना विवि के प्रतिकुलपति डा. एसआई अहसन, कुलसचिव डा. विभाष कुमार यादव, कार्यक्रम के संयोजक बीडी कॉलेज के प्राचार्य सीताराम सिंह, पटना वीमेंस कॉलेज की प्राचार्य डा. डॉरिस डीसूजा, मारवाड़ी कॉलेज के प्राचार्य डा. बीएस झाड्ढr आदि मौजूद थे। मंच का संचालन पटना विवि के विकास पदाधिकारी डा. संजय सिंह ने की।ं

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