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डॉलर मजबूत, फिर खिले चेहरे निर्यातकों के

आईटी कैपिटल बैंगलुरु से लेकर वित्त राजधानी मुम्बई और आगरा तक के निर्यातकों के महीनों से मुरझाए हुए चेहर खिलने लगे हैं। डॉलर के फिर से रुपये के मुकाबले मजबूत होने के चलते आईटी, इंजीनियरिंग उपकरणों का निर्माण करने वाली, चमड़े के उत्पाद बनाने वाली बड़ी छोटी कंपनियां फिर से अपने रुके पड़े माल को बाहर भेजने के लिए कमर कसने लगीे हैं। इनके अलावा हस्तशिल्प, फैशन और ज्वैलरी उद्योग भी निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी । टीसीएस,सत्यम,विप्रो, इंफोसिस सरीखी चोटी की आईटी कंपनियों को उम्मीद है कि उनके आगामी तिमाही नतीजों में उनका कुल मुनाफा डॉलर के मजबूत होने की वजह से छलांग लगाएगा। ध्यान रहे कि इस वित्त साल के शुरू होने से अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले 6.67 प्रतिशत कमजोर हुआ है। प्रख्यात अर्थशास्त्रियों की संस्था एनसीएईआर के डा. दिलीप कुमार कहते हैं कि हाल के दिनों में कच्चे तेल के दामों में तगड़ी वृद्धि के चलते रुपया कमजोर होता गया। इस मोर्चे पर भारत को राहत मिलने वाली नहीं। उद्योग और वाणिज्य संगठन एसोचैम के महासचिव डी.एस.रावत ने कहा कि डॉलर के मजबूत होने के फलस्वरूप करीब दस हाार करोड़ रुपये के उन एक्सपोर्ट ऑर्डरों पर अमल हो सकेगा जिन्हें निर्यातकों ने रोक रखा था। इनमें आगरा के चमड़ा उत्पादों के भी निर्यातक हैं। ये छोटे दज्रे के निर्यातक है, जिन्हें रुपये की मजबूती ने बहुत चोट पहुंचाई थी। जानकारों का कहना है कि आगरा से हर साल अमेरिका तथा ब्रिटेन में तगड़ा निर्यात होता है। उधर, लारसन एंड टूब्रो तथा महिन्द्रा जसी इंजीनियरिंग कंपनियों को भी लाभ होने जा रहा है, जो इंजीयिरिंग उपकरणों का निर्यात करते हैं। फिक्की के प्रवक्ता ने कहा कि डॉलर की मजबूती से हाारों छोटे -बड़े भारतीय निर्यातकों ने चैन की सांस ली है।

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