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यूपीएससी में बजा बिहारियों का डंका

दूध विक्रेता का बेटा बना आईएएसड्ढr आरा (सं.सू.प्रशांत रांन)। कहते हैं कि प्रतिभा संसाधनों का मोहताज नहीं होती। जज्बा और कुछ कर गुजरने की लालसा हो तो रास्ते खुद व खुद बनने शुरू हो जाते हैं। कुछ इसी जज्बे के साथ आईएएस परीक्षा में सफलता पाई है दूध विक्रेता जयनारायण सिंह के पुत्र कुमार रविकांत सिंह ने। बड़हरा के अलेखी टोला के कुमार रविकांत ने अपनी मां की अंतिम सपनों को पूरा करके दिखाया है। उसने संघर्ष का दामन कभी नहीं छोड़ा। और दूसर प्रयास में ही सफलता पाई है। छह साल की तपस्या फलीभूत, रणजीत को मिला 4वां स्थानड्ढr पटना (हि.प्र.)। ह्यहेलो बाबूजी, हम रणजीत। यूपीएससी के रिाल्ट आ गेलई। हम त अब कलक्टर बन गेलिअऔ। वैशाली जिला के देसरी थाना के फटिकवारा गांव के रहनेवाले व पटना में रहकर पढ़ाई करने वाले रणजीत कुमार सिंह ने यूपीएससी की परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन व 4वां स्थान प्राप्त करने की सूचना सबसे पहले अपने पिता रामटहल सिंह को दी। पिता ने पुत्र की सफलता पर सबसे पहले तो आशीर्वाद दिया और फिर कहा कि चल तोहर तपसिया सफल भेलोअ। पिछले छह साल से अपने गांव न जाकर लगातार परिश्रम करने वाले छात्र ने बताया कि मैंने पहले ही प्रण किया था कि जब तक यूपीएससी की परीक्षा पास नहीं करूंगा, तब तक गांव नहीं जाऊंगा। आज उसे नाज है अपनी सफलता पर। ऊधर गांव में जब उसके पिता ने उनकी सफलता के बार में सुना तो उनका सीना भी गर्व से फूल गया। वहीं रणजीत की भावुक मां महादेवी पटेल रोने लगीं और उसने कहा ह्यबबुआ अब घर चल अइहऽ। राजकीय उच्च विद्यालय, देसरी से मैट्रिक पास करने के बाद उन्होंने साइंस कॉलेज से विज्ञान विषय में इंटर पास किया। इसके बाद इतिहास विषय से पटना कॉलेज से स्नातक व पटना विवि से स्नातकोतर की डिग्री ली। अभी वे पटना विवि से पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम पर शोध कर रहे हैं, जिसमें उनके सुपरवाक्षर पटना कॉलेज के प्राचार्य डा. रणविजय कुमार हैं। रणजीत ने बताया कि आईएएस बनने का सपना मैंने नौवीं कक्षा में देखा था और आज जब यह पूरा हुआ है। चम्पारण की बहू को देश में 15वां स्थानड्ढr बगहा (न.सं.)। स्मिता सारंगी ने भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा में पूर देश में 15वां स्थान प्राप्त कर चम्पारण को गौरवान्वित किया है। विलासपुर पीली कोठी की बहू स्मिता यूपीएससी की वर्ष 2007 की परीक्षा में बिहार-झारखंड में महिलाओं में शिखर पर रही हैं। स्मिता फिलहाल जेएनयू से एमए व एमफिल करने के बाद वहीं से समाजशास्त्र में पीएचडी कर रही हैं। पीली कोठी का पूरा परिवार इस उपलब्धि पर गौरवान्वित महसूस कर रहा है। इस परिवार के सदस्य पूर्व मंत्री राय विश्वमोहन शर्मा का कहना है कि भागवान ने हमें सब कुछ दिया है, बस इसी की कमी थी। किन्तु पतोहू ने इस कसर को भी दूर कर दिया। स्मिता के पति कनिहार कांत उर्फ अंशु ने बताया कि उनकी पत्नी ने यह उपलब्धि अपने बलबूते व बुजुर्गो के आशीर्वाद से हासिल किया है। कनिहार भी फि लवक्त जेएनयू में कार्यरत हैं। झारखंड के टाटा निवासी डॉ. सोमनाथ सारंगी की लाडली स्मिता गत वर्षड्ढr कनिहार कांत उर्फ अंशु से परिणय सूत्र में बंधी थी। पतोहू के चयन पर कृष्णकांत राय उर्फ बच्चन बाबू का कहना है कि यह उनके परिवार के लिए गौरव का क्षण है। पिता स्व. रायड्ढr गोविन्द कांत व परिवार के अन्य सदस्यों की दुआ से यह सफलता मिली है। ड्ढr दरभंगा के नन्दकुमारम को आठवां स्थानड्ढr दरभंगा (हि.सं.)। दरभंगा के नन्दकुमारम ने संघ लोक सेवा आयोग की सिवलि सर्विसेज परीक्षा में आठवां स्थान लाकर मिथिलांचल और बिहार का नाम रौशन किया है। वे घनश्यामपुर प्रखंड के गोई मिश्र लगमा गांव के रहनेवाले हैं। राज्य खाद्य निगम में जिला प्रबंधक (पटना) आद्यानंद झा और श्रीमती मीना झा के 27 वर्षीय पुत्र नन्दकुमारम ने वर्ष 1में देवघर से प्रतिशत अंक के साथ दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। डीएवी स्कूल, श्यामली (रांची) से 12 वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स (धनबाद) से पेट्रोलियम इंजीनियरिंग की और कैम्पस सलेक्शन के तहत ओएनजीसी में नौ महीने तक काम किया। 2005 की यूपीएससी परीक्षा में उन्हें 240वां स्थान मिला और वे इंडियन रल ट्रैफिक सर्विस के लिए चुने गए। लखनऊ में उन्होंने असिस्टेंट ऑपरशन मैनेजर के रूप में काम करना शुरू किया। इस दौरान उन्होंने यूपीएससी में और अच्छा रैंक हासिल करने का प्रयास जारी रखा और वर्ष 2007 की परीक्षा में, जिसका परिणाम दो दिन पूर्व घोषित हुआ है, आठवां स्थान हासिल कर अपनी दृढ़ इच्छाशक्ित का परिचय दिया। दूरभाष पर ‘हिन्दुस्तान’ के साथ बातचीत में श्री नन्दकुमारम ने कहा कि आईएएस अधिकारी बनकर वे देश के विकास में सीधी सहभागिता निभाना चाहते हैं। जीवन में अपने पिता-माता को आदर्श माननेवाले श्री नन्दकुमारम जीबी रामाकृष्णनन एवं टीएन शेषण से खासे प्रभावित हैं।ं

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