DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

तीस और एससी-एसटी थाने खुलेंगे

नीतीश सरकार सूबे में 30 और अनुसूचित जाति- जनजाति थाने खोलेगी। अब दलितों को प्रताड़ना संबंधी अपने मामलों को दर्ज कराने जिले से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। राज्य के हर जिले में एक दलित थाना होगा। अभी मात्र दस दलित थानों पर ही पूर राज्य के दलितों के केस की जिम्मेवारी है। इन थानों में अनुसूचित जाति-ानजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामले दर्ज होते हैं। नये थानों के खुल जाने के बाद इनकी कुल संख्या 40 हो जाएगी। नये थानों को खोलने का निर्णय अनुसूचित जाति-ानजाति कल्याण विभाग की बैठक में लिया गया।ड्ढr ड्ढr थानों की संख्या इसलिए बढ़ाई जा रही है ताकि पुलिस त्वरित अनुसंधान कर सके और दलितों को जल्दी न्याय मिल सके। अनुसूचित जाति-ानजाति कल्याण मंत्री जीतनराम मांझी ने कहा कि शीघ्र ही नये थाने खोले जाएंगे।ड्ढr अभी तक दस अनुसूचित जाति थानों में ही सभी 38 जिलों के दलितों को अपना मामला लेकर जाना पड़ता है। उदाहरण के लिए वैशाली जिले के थाने पर इस जिले के अलावा मोतिहारी, सीवान, सारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, बेतिया और बगहा की जिम्मेवारी है।ड्ढr ड्ढr बेगूसराय के दलित थाने पर बेगूसराय के अलावा खगड़िया, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, अररिया और सुपौल तक के मामले दर्ज होते हैं। गया में स्थित दलित थाना को अरवल, जहानाबाद औरंगाबाद और नवादा तक के मामले लेने पड़ते हैं। इनके अलावा भागलपुर, रोहतास, भोजपुर, पटना, समस्तीपुर और मुंगेर में दलित थाने हैं। एक-एक थाने पर कई जिलों की जिम्मेवारी होने के कारण एक तो दलित उत्पीड़न संबंधी अपने मामलों को लेकर वहां पहुंच ही नहीं पाते थे और दूसरी तरफ पुलिस भी दर्ज मामलों का अनुसंधान ठीक से नहीं कर पाती थी। संसाधनों के मामले में भी ये थाने अच्छी स्थिति में नहीं हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: तीस और एससी-एसटी थाने खुलेंगे