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दो और मंत्री कानून के घेरे में

नीतीश सरकार के दो और मंत्री कानून के घेर में हैं। हाल ही में कैबिनेट मंत्री बने भगवान सिंह कुशवाहा एक नरसंहार के प्रमुख अभियुक्त हैं और उनके खिलाफ मामला आरा के फास्ट ट्रैक कोर्ट में विचाराधीन है। दूसरी तरफ राज्यमंत्री जमशेद अशरफ को भी एक आपराधिक मामले में बेगूसराय की एक अदालत में समर्पण कर जमानत लेनी पड़ी है। वर्ष 1में भोजपुर जिले के इचरी नरसंहार में पांच लोगों की हत्या कर दी गई थी।ड्ढr ड्ढr श्री कुशवाहा तब आईपीएफ के विधायक थे और उनके खिलाफ इस नरसंहार को अंजाम देने वाले दस्ते की अगुआई करने से संबंधित प्राथमिकी जगदीशपुर थाने में दर्ज कराई गई थी। बाद में पुलिस ने चार्जशीट से उनका नाम ही गायब कर दिया। जब चश्मदीदों ने अदालत का ध्यान इस ओर दिलाया तब कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए श्री कुशवाहा के खिलाफ गवाही शुरू कराने का आदेश दिया। गवाहों ने श्री कुशवाहा पर आरोप लगाया कि वह एक किसान की जमीन पर पार्टी का झंडा गाड़ना चाहते थे जिसका विरोध करने पर नरसंहार को अंजाम दिया गया। गिरफ्तारी से बचने को श्री कुशवाहा फिलहाल हाईकोर्ट से जमानत पर हैं। मामले में 10 लोगों की गवाही हो चुकी है। श्री अशरफ के खिलाफ आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का मुकदमा तब का है जब वे बेगूसराय के बलिया से जद यू प्रत्याशी के रूप में विधानसभा चुनाव लड़ रहे थे। तत्कालीन बीडीओ ने उन पर बिना अनुमति चुनाव कार्यलय खोलने तथा पोस्टर सटवाने का आरोप लगा केस दर्ज कराया था। पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल किये जाने के बाद सीजेएम कोर्ट ने इस मामले में को बेगूसराय के न्यायिक दण्डाधिकारी रामसूरत पाण्डेय के यहां स्थानान्तरित कर दिया जहां से उनको जमानत मिली।

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