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हर बाधा पार कर बधिर ने मारी बाजी

ाब इरादे बुलंद हो तो कोई भी बाधा इंसान के सपनों की राह नहीं रोक पाती है। यही साबित किया है जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के के. मनोरांन नायक ने। पूर्ण रूप से बधिर श्री नायक इस वर्ष की संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा के सफल विद्यार्थियों की सूची मे अपना स्थान बनाने सफल रहे हैं। संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा में यह उनका दूसरा प्रयास था। पिछले वर्ष वह इस परीक्षा में साक्षात्कार तक पहुंचने में सफल रहे थे। मुख्य परीक्षा में ऐच्छिक विषयों के रूप में उन्होंने समाज शास्त्र व लोक प्रशासन को चुना था। उड़ीसा के अत्यंत पिछड़े इलाके कोरापुट से आने वाले श्री नायक अत्यंत साधारण परिवार से आते हैं।ड्ढr ड्ढr उनके पिता पूर्णचंद्र खैरा उड़ीसा में तेंदू पत्ता फॉरस्टर का काम करते हैं। अपनी शारीरिक विकलांगता को अपने सपनों की राह में कभी आड़े नहीं आने दिया। पांच भाई बहनों के परिवार में वह सबसे बड़े हैं। वे न केवल स्वयं उड़ीसा के पिछड़े इलाके से निकल कर देश के शीर्षस्थ शिक्षण संस्थान जेएनयू पहुंचे बल्कि उनके मार्गदर्शन की बदौलत उनकी बहन के.सुधारानी नायक इस वर्ष जेएनयू में पॉलिटिकल साइंस एम.ए पाठ्यक्रम में दाखिला पाने में सफल रही है। निराश होना व दुखी होना उन्होंने सीखा नहीं है। ब्रह्मपुत्र छात्रावास के उनके साथी उसे सदैव हंसमुख रहने वाले छात्र के रूप में जानते हैं। जेएनयू छात्र संघ चुनावों के पूर्व चुनाव आयुक्त रहे नेताजी अभिनंदन ने बताया कि मनोरांन के इस परीक्षा में सफल होने से सभी खुश हैं। वह हमेशा छात्रावास की सभी गतिविधियों में बढ-चढ़ कर भाग लेता है।

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