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शिशु रेल की सवारी कब आएगी बारी

संजय गांधी जविक उद्यान में इन दिनों शिशु रल की सवारी के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। टिकट कटाने के बाद ढाई से तीन घंटे तक लोग ट्रेन खुलने का इंतजार करते हैं। यह समस्या उत्पन्न हुई है उद्यान में आगंतुकों की संख्या कम होन से। गर्मी व चिलचिलाती धूप के कारण उद्यान में कम लोग आ रहे हैं। शिशु रल खुलने के लिए कम-से-कम बच्चे-बड़े मिलाकार 50 यात्रियों का होना जरूरी है। इतने यात्री पूरा होने में काफी समय लग जा रहा है। ट्रेन में बैठे यात्री बार-बार कर्मियों से पूछते हैं कि कब चलेगी ट्रेन। शुक्रवार को शिशु रल ने पहला चक्कर दोपहर एक बजे व दूसरा 3.30 बजे लगाया। शनिवार व रविवार को छोड़ प्राय: सभी दिन शिशु रल का यही हाल रहता है। शनिवार को शिशु रल ने कुल आठ चक्कर लगाए। आम दिनों में 7-8 राउंड व शनिवार व रविवार को 12 राउंड शिशु रल चलती थी। ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचते ही सीट लूटने ही आपा-धापी शुरू हो जाती थी। उद्यान के अधिकारी बताते हैं कि तेज गर्मी व बारिश के समय में उद्यान में आगंतुकों की कमी हो जाती है। इससे राजस्व भी कम जाता है। शिशु रल में बड़ों का दस व बच्चों का किराया पांच रुपये है। हालांकि स्कूलों में गर्मी की छुट्टी के शुरू होने से उद्यान प्रशासन को उम्मीद है कि आगंतुकों की संख्या में निश्चित रूप से क्षाफा होगा।

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