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आश्वासनों का मुलम्माचेयरमैन,झारखंड स्टेट इलेक्िट्रसिटी बोर्ड,

आश्वासनों का मुलम्माचेयरमैन,झारखंड स्टेट इलेक्िट्रसिटी बोर्ड,ड्ढr ड्ढr सर्वविदित है कि अखबारों के माध्यम से प्राय: आपके विभाग से जो सूचनाएं विद्युत उत्पादन की दी जाती है, वह मात्र जनता को दिग्भ्रमित करने का प्रयास है।ड्ढr पिछले 25 वर्षो से विद्युत विभाग द्वारा आपूर्ति को सुचारू करने हेतु नये प्लांट की स्थापना का स्वप्न जनता को दिखाया जाता रहा है। इसके बाद अब आपके द्वारा गलत घोषणाएं कर राज्य की जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया जा रहा है। जनता इन झूठे आश्वासनों को सुनते-सुनते थक चुकी है। यदि विद्युत विभाग नये प्लांट को स्थापित करने के लिए वास्तव में गंभीर है तो विभाग को यह भी स्पष्ट कर देना चाहिए कि उसके लिए भूमि का चयन या अधिग्रहण कहां किया गया है। संभवत: मेरी जानकारी में अभी तक यही है कि नये प्लांट को स्थापित करने के लिए भूमि का चयन या अधिग्रहण तक कहीं भी नहीं किया गया है।ड्ढr यदि विद्युत की आपूर्ति सुचारू रूप से उपभोक्ता को नहीं होती है तो उपभोक्ता द्वारा विद्युत विभाग का घेरावविधान सभा का घेराव सड़क अथवा रल यातायात बाधित करना आदि स्वाभाविक ही है। विद्युत आपूर्ति के अभाव में इस भीषण गर्मी में जलापूर्ति का बाधित होना आम बात है जिसके लिए विद्युत विभाग के पदाधिकारीगण कभी भी गंभीर नहीं हुए। यही कारण है कि उपभोक्ता यदि इन समस्याओं को लेकर उग्र रूप धारण करता है तो प्रशासन द्वारा विधि व्यवस्था का आरोप लगाकर उसे शांत तो कर दिया जात है किंतु सुधार की दिशा में बिजली विभाग के कान पर जूं तक नहीं रंगती। विभाग इसे ढाक के तीन पात वाली कहावत मानकर मौन धारण कर लेता है। उसी प्रकार लघु उद्योग के क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति प्राय: बाधित रहने के कारण उत्पादन पर इसका कुप्रभाव पड़ता है। इस संबंध में सुधार की दिशा में झारखंड लघु उद्योग संघ की ओर से पूर्व में एक पत्र सं - जेएसआईएसई-207-08277 दिनांक 15 नवंबर 2007 आपको प्रषित किया गया। पत्र का कृपया स्मरण करं, जिससे स्पष्ट हेागा कि टाटी सिल्वे यूनिट लघु उद्योग क्षेत्र में व्यवसायी वर्ग को काफी क्षति उठानी पड़ती है जब कि अन्य यूनिटों की तुलना में इस क्षेत्र से प्रत्येक साल विद्युत विभाग को 2.5 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। इसी क्रम में यह भी उल्लेख करना उचित समझता हूं कि बोर्ड चेयरमैन के व्यक्ितगत प्रयास के बावजूद अभी तक टाटीसिल्वे से आरा मेन गेट की मात्र 4 किलोमीटर की दूरी में विद्युत लाईन अभी तक नहीं खींची जा सकी है जो विभाग की हास्यास्पद स्थिति ही परिलक्षित करता है। औद्योगिक नीति का मजाक हो रहा है।ड्ढr बहुत थोड़ी लागत से विद्युत विभाग अपने राजस्व में 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि कर सकता है किंतु विभागीय पदाधिकारियों की अकर्मण्यता के कारण विभाग में सुधार के स्थान पर कुव्यवस्था का वातावरण व्याप्त है, जिसे अब जनता सहन नहीं कर पा रही है। विद्युत विभाग राज्य की जनता को ठोस सबूत के साथ यह बताने का प्रयास क्यों नहीं कर रहा है कि विगत 25 वर्षो से व्यवस्था में क्या सुधार हुआ है, यदि नहीं तो कब तक जनता सुधार के झूठे आश्वासन रूपी नदी में गोते लगाती रहे। विभाग के लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है क्योंकि विभाग के कार्यकलापों से जनता का विश्वास प्राय: समाप्त हो चुका है। जब शहरी क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की स्थिति लचर है तो ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की क्या स्थिति होगी सहज ही कल्पना की जा सकती है। झारखंड के एक उद्यमी की हैसियत से 25 से 50 प्रतिशत तक उत्पादन का नुकसान लगातार 25 वर्षो तक सहने के बाद अब कोई आशा करना महज बेवकूफी होगी। आपसे अनुरोध है कि हर समय हर व्यक्ित को बेवकूफ न बनायें तो उचित होगा।ड्ढr आपकाड्ढr एक लघु उद्यमीबिजली बोर्ड के चेयरमैन के नाम खुला पत्रराज्य अभूतपूर्व बिजली संकट से जूझ रहा। कारोबारियों की हालत पतली है। बिजली बोर्ड के दावे फुस्स साबित हुए हैं। लोगों को बिजली की खपत कम करने की सलाह दी जा रही। बोर्ड चेयरमैन को एक उद्यमी महेश पोद्दार का लिखा यह पत्र आम लोगों की पीड़ा बयां करता है। ं

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