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रामानंद का इस्तीफा

घटिया पाइप खरीद के मामले में फंसे परिवहन मंत्री रामानन्द प्रसाद सिंह ने आखिरकार शनिवार को मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया है। शनिवार को ही ‘हिन्दुस्तान’ में श्री सिंह पर अधिक कीमत पर घटिया क्वालिटी की पाइप खरीदने के आरोप संबंधी खबर प्रकाशित हुई।ड्ढr इसी के बाद उन्होंने एक अणे मार्ग जाकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपना इस्तीफा सौंपा, जिसे मंजूरी के लिए तत्काल राजभवन भेज दिया गया। बाद में राज्यपाल ने उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया। फिलहाल परिवहन विभाग की जिम्मेदारी सीएम के ही पास रहेगी। इस्तीफे के बाद सत्ता के गलियारे में राजनीतिक पारा अचानक बढ़ गया। खासकर मंत्रिमंडल से हटाये गये भाजपा-जदयू के विक्षुब्धों के मोबाइल तो सच्चाई जानने के लिए घंटों व्यस्त रहे। सीएम ने श्री सिंह से इस्तीफा लेकर एकबार फिर यही साबित किया है कि मंत्रिमंडल में दागियों के लिए जगह नहीं है। जैसा कि उन्होंने नवंबर, 05 में शपथग्रहण के 24 घंटे के भीतर ही जीतनराम मांझी को बाहर का दरवाजा दिखा कर किया था। एक अणे मार्ग में श्री सिंह ने मुख्यमंत्री को वस्तुस्थिति से अवगत कराया। वहां से आवास लौटकर वे अपने परिजनों के साथ विचार-विमर्श में मशगूल हो गये। उनपर मुजफ्फरपुर स्थित कांटी थर्मल पावर स्टेशन में फ्यूल टक्नोलॉजिस्ट के पद रहते हुए अधिक कीमत पर घटिया क्वालिटी की पाइप खरीदने का आरोप है। विजीलेंस ने इनके खिलाफ 24 मई 10 को मामला दर्ज किया। उनके खिलाफ 11 दिसंबर 1ो चार्जशीट दाखिल हुई। दो और मंत्री घेर मेंड्ढr भोलानाथ पटना नीतीश सरकार के दो और मंत्री कानून के घेर में हैं। हाल ही में मंत्री बने भगवान सिंह कुशवाहा एक नरसंहार के अभियुक्त हैं और उनके खिलाफ मामला आरा की कोर्ट में विचाराधीन है। दूसरी तरफ मंत्री जमशेद अशरफ को भी आपराधिक मामले में बेगूसराय की अदालत में सरंडर कर जमानत लेनी पड़ी है। 1में भोजपुर के इचरी नरसंहार में पांच की हत्या कर दी गयी थी। कुशवाहा तब आइपीएफ के विधायक थे और उनके खिलाफ इसको अंजाम देने वाले दस्ते की अगुआई की प्राथमिकी जगदीशपुर थाने में दर्ज करायी गयी थी। लेकिन पुलिस द्वारा चार्जशीट से उनका नाम ही गायब कर दिए जाने पर नरसंहार के चश्मदीदों ने अदालत का ध्यान इस ओर दिलाया। तब कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए श्री कुशवाहा के खिलाफ गवाही शुरू कराने का आदेश दिया। गवाहों ने श्री कुशवाहा पर आरोप लगाया है कि अपनी अगुआई में कुछ लोगों के साथ वह एक किसान की जमीन पर अपनी पार्टी का झंडा गाड़ना चाहते थे जिसका विरोध करने पर नरसंहार को अंजाम दिया गया। गिरफ्तारी से बचने को श्री कुशवाहा फिलहाल जमानत पर हैं। आरा फास्ट ट्रैक कोर्ट में इस मामले में 10 लोगों की गवाही हो चुकी है।ड्ढr श्री अशरफ के खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का मुकदमा तब का है जब वह बेगूसराय के बलिया से जद यू प्रत्याशी के रूप में विधानसभा चुनाव लड़ रहे थे। तत्कालीन बीडीओ ने उन पर बिना अनुमति चुनाव कार्यलय खोलने तथा पोस्टर सटवाने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया। पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल किये जाने के बाद सीजेएम कोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लेकर केस को बेगूसराय के न्यायिक दण्डाधिकारी रामसूरत पाण्डेय के यहां स्थानान्तरित कर दिया जहां से उनको जमानत मिली।ड्ढr

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