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वाह वान

इंडियन प्रीमियर लीग शुरू होने से पहले जिस टीम को सबसे कमजोर आंका जा रहा था, आज वह चोटी पर है। वैसे अप्रत्याशित परिणाम से ही खेल में रोमांच की लहरं उत्पन्न होती हैं। शेन वार्न ने मानो जयपुर की टीम का भाग्य बदल दिया है। फिरकी के इस जादूगर ने अपनी कप्तानी में वह कमाल कर दिखाया जिसकी दाद सब दे रहे हैं। उसने मामूली खिलाड़ियों के अपने दल को एक अजेय दुर्ग में परिवर्तित कर दिया। उसकी टीम के हर खिलाड़ी की भूमिका तय है, प्रत्येक मैच से पहले रणनीति का स्पष्ट खाका खींच लिया जाता है और मैदान में पूरी मेहनत से उस पर अमल होता है। परिणाम सामने है। जयपुर की सफलता के आगे सब नतमस्तक हैं। सितारों से सजी बेंगलूरऔर मुम्बई की टीमें फीकी पड़ गई हैं। लगभग एक वर्ष पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके वार्न ने आईपीएल का गणित गड़बड़ा दिया है। पकी उम्र (38 वर्ष) और भीषण गर्मी के बावजूद आस्ट्रेलिया के इस महान गेंदबाज के उत्साह में कोई कमी नहीं है। वार्न अपनी टीम का कप्तान ही नहीं कोच भी है और उसकी पारखी नजरों ने जयपुर टीम के हर खिलाड़ी की खूबी और कमजोरी को भांपकर उसकी भूमिका तय की है। क्रिकेट में उसका कद इतना बड़ा है कि साथी खिलाड़ियों से भरपूर सम्मान मिलता है, इसीलिए उसकी सलाह पर कोई ना-नुकर नहीं करता। इसे आस्ट्रेलिया का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि उसने कभी वार्न को बतौर कप्तान नहीं आजमाया। वैसे तो बड़ा खिलाड़ी होना एक बात है और सफल कप्तान होना दूसरी, किन्तु वार्न महान गेंदबाज होने के साथ-साथ सफल कप्तान भी सिद्ध हुआ है। आईपीएल का आधे से अधिक सफर तय हो चुका है। आगे-आगे मुकाबले और कड़े होते जाएंगे। भूल सुधार का अवसर भी नहीं मिलेगा। वैसे तो बीस-बीस टूर्नामेंट में कोई भी अनुमान लगाना खतर से खाली नहीं, किंतु वार्न के नेतृत्व में जयपुर की टीम ने अब तक जो उपलब्धि अर्जित की है, इतराने को वही काफी है। आगे जो मिलेगा वह बोनस ही होगा। आशा है वार्न अपनी टीम को बोनस दिलाकर ही दम लेगा

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