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कांग्रेस को लग सकते हैं और झटके

पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री अखिलेश दास और उनके कुछ समर्थकों के कांग्रेस छोड़ने के बाद उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को कुछ और झटके लग सकते हैं। कम से कम चार लोकसभा सदस्य, विधायक, विधान पार्षद एवं वरिष्ठ नेता कांग्रेस को बाय बाय करने के लिए तैयार बैठे हैं। उन्हें सिर्फ मुख्यमंत्री मायावती की हरी झंडी का इंतजार है। इसकी भनक कांग्रेस आलाकमान को भी लग चुकी है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने तीन चार दिन पहले कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रमोद तिवारी को यहां बुलाकर प्रदेश कांग्रेस और उसके नेताओं की गतिविधियों का जायजा लिया था। उत्तर प्रदेश से पिछली बार कांग्रेस के कुल नौ लोकसभा सदस्य चुनाव जीते थे। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार दो-तीन को छोड़ दें तो अधिकतर को अगले चुनाव में भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। उन्हें भरोसा नहीं कि मौजूदा नेतृत्व उन्हें चुनावी वैतरणी पार करा सकेगा। कांग्रेस और बसपा के भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार वाराणसी से चुनाव जीते राजेश मिश्रा, गाजियाबाद से सुरंद्र गोयल बसपा नेतृत्व के संपर्क में हैं। श्री मिश्र केंद्रीय मंत्रिपरिषद के हाल के विस्तार में राज्य मंत्री नहीं बनाए जाने से खफा हैं। उनकी करीबी रिश्तेदारी हरिशंकर तिवारी के साथ हैं जिनके एक पुत्र बसपा के टिकट पर बलिया का संसदीय उपचुनाव हार चुके हैं जबकि बसपा के टिकट पर ही उनके दूसर पुत्र खलीलाबाद का संसदीय उपचुनाव जीत चुके हैं। श्री मिश्रा ने उन उपचुनावों में कांग्रेस के पक्ष में प्रचार से इनकार कर दिया था। सुरंद्र गोयल की गिनती अखिलेश दास के करीबी लोगों में की जाती है।ड्ढr मंत्रि परिषद में शामिल नहीं किए जाने के कारण अलीगढ़ के विजेंद्र सिंह और मथुरा के मानवेंद्र सिंह कांग्रेस के प्रति अपनी नाराजगी छिपाते नहीं। इनमें से एक सपा नेता मुलायम सिंह के संपर्क में बताए जाते हैं। अखिलेश दास के एक और खासुलखास विधान परिषद में कांग्रेस के नेता नसीब पठान के भी निकट भविष्य में उनका ही अनुसरण करने की अटकलें लगाई जा रही हैं। नई जगह पर भूमिका तय हो जाने पर वह कांग्रेस छोड़ने की घोषणा कर सकते हैं। अमेठी के डा. संजय सिंह और पार्टी के विधायक आर पीएन सिंह भी कांग्रेस की रीति नीति से खुश नहीं बताये जाते। ड्ढr

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