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सीपीएमटी का मुख्य जालसाज धरा गया

इस वर्ष की सीपीएमटी को भी अपनी करतूत से विवाद में लाने वाले डॉ.अरविन्द मौर्या को पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार कर लिया। इस डॉक्टर ने वर्ष 2005 से 2008 तक की परीक्षा में खुद व अन्य साल्वर की मदद से कई परीक्षार्थियों को एमबीबीएस व बीएएमएस में प्रवेश दिलाया है। यह लोग यूपी के अलावा महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं। इसके पास से सात अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र बरामद हुए हैं जो अलग- अलग प्रदेशों की मेडिकल परीक्षाओं के हैं। अरविन्द के सहयोगी डॉ.शरद की तलाश की जा रही है। पुलिस उन छात्रों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सम्बन्धित मेडिकल कॉलेजों को पत्र लिख रही है जो अरविन्द की मदद से चयनित हुए हैं।ड्ढr सीओ महानगर राहुल श्रीवास्तव के नेतृत्व में पुलिस ने बुधवार को सीपीएमटी में राजेन्द्र की जगह परीक्षा दे रहे ज्ञानेन्द्र को गिरफ्तार कर लिया था। राजेन्द्र का भाई महेन्द्र तीस हाार रुपए देते समय पकड़ा गया था। इनसे पूछताछ के बाद ही सरगना डॉ.अरविन्द मौर्या को पुलिस ने तलाशना शुरू किया। दोनों के पकड़े जाने के बाद अरविन्द बाराबंकी भाग गया था। एसएसपी ने उस पर ढाई हाार रुपए का इनाम घोषित किया था। रविवार को पुलिस ने उसे चारबाग में गिरफ्तार किया। बाजारखाला, भवानीगंज निवासी डॉ.अरविन्द ने बताया कि पिछले साल ही उसे डिग्री मिली है। इस बीच वह ट्रेनिंग के दौरान राजकीय आयुव्रेद कॉलेज में तैनात भी रहा। अरविन्द के मुताबिक उसने 2006 में जितेन्द्र, इसी साल डिप्लोमा इन फार्मेसी परीक्षा में अभिषेक, बंगलुरु में 2007 की मेडिकल परीक्षा में प्रतीक के लिए परीक्षा दी थी। प्रतीक इस समय नेशनल होम्योपैथिक कॉलेज में पढ़ रहा है। पुलिस ने बताया कि 2006 में बलरामपुर अस्पताल में इन्टर्नशिप के दौरान उसकी दिल्ली निवासी डॉ. शरद से मुलाकात हुई थी। डॉ. शरद के साथ उसने काफी रुपया कमाया। एमबीबीएस में प्रवेश होने पर दो लाख, बीएएमएस में दाखिला मिलने पर छात्र से एक लाख रुपए वसूले जाते हैं। शरद के साथ ही पुलिस राजेन्द्र की भी तलाश कर रही है। ड्ढr

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