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बीमार हो रहा शहर

शहर में वायरस जनित बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है। लोग खसरा-चिकनपॉक्स व पीलिया के जानलेवा वायरस की चपेट में हैं। एक महीने के भीतर लगभग आधा दर्जन लोगों की चिकनपॉक्स से मौत हो चुकी है पर नगर स्वास्थ्य अधिकारी बेखबर हैं। वह वायरस से होने वाली मौतों को दूसरी बीमारी बताकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। सड़क पर कटे फल व खुली खान-पान सामग्री धड़ल्ले से बिक रही है पर इनके खिलाफ अभियान नहीं चलता। इसकी वजह से हेपेटाइटिस ‘ए’ यानी पीलिया से संक्रमित लगभग 200 मरीा प्रतिदिन सरकारी अस्पतालों में पंजीकृत हो रहे हैं। पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था पटरी से उतर गई है। न तो बचाव कार्यक्रम चल रहे हैं न ही संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए कोई कार्ययोजना है। नगर स्वास्थ्य विभाग के पास बचाव टीम नहीं है। 40 लाख की आबादी वाले लखनऊ में एक भीोोनल स्वास्थ्य अधिकारी नहीं है। सभी छह पद अर्से से रिक्त चल रहे हैं। एक सेनेटरी इंस्पेक्टर पर शहर की साफ-सफाई की जिम्मेदारी है।ड्ढr ऐशबाग, लवकुश नगर, इंदिरानगर व पुराने शहर के मोमिन नगर, झवईं टोला, यासीनगंज, मुसाहबगंज व सआदतगंज के दूसर इलाकों में गंदगी से जीना मुहाल है। नालियाँ पूरी तरह पट चुकी हैं। यहाँ चिकनपॉक्स व खसरा लोगों का पीछा नहीं छोड़ रहा। सीमएओ व नगर स्वास्थ्य अधिकारी आपस में भिड़ रहे हैं। सीएमओ का कहना है कि नगर निगम सफाई नहीं कराता। दूषित जलापूर्ति हो रही है। इसके लिए नगर स्वास्थ्य अधिकारी कुछ नहीं करते। वहीं नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.गुरुचरन सिंह का कहना है कि बीमारी बढ़ने से रोकने के लिए सीएमओ जिम्मेदार हैं। शहरी क्षेत्रों में संक्रामक रोग के बचाव की जिम्मेदारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी की है। संक्रामक रोग फैलने के बावजूद कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुँचता जबकि चिकनपॉक्स व खसरा के मरीाों को तुरन्त ही अस्पताल के ‘आइसोलेटेड वार्ड’ में भर्ती करा देना चाहिए क्योंकि खुले वातावरण में रहने से यह बीमारियाँ तेजी से फैलती हैं। नगर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी निकट के अस्पतालों में भी बीमारी फैलने की सूचना नहीं देते। इसे लेकर सीएमओ व नगर स्वास्थ्य अधिकारी आमने-सामने भी आ जाते हैं। यही हाल खुले-कटे फल व खाद्य पदार्थो की बिक्री को लेकर भी है। गली-मोहल्लो में गन्ने का रस धड़ल्ले से बिक रहा है। खुली खान-पान सामग्री की बिक्री रोकने भी कोई नहीं आता। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शमशुद्दीन का कहना है कि वायरस जनित बीमारियाँ बच्चों को अधिक हो रही हैं क्योंकि उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। उन्हें खसर के साथ निमोनिया भी हो रहा है। अप्रैल-मई-ाून की जलवायु में बीमारियों के फैलने की आशंका अधिक रहती है क्योंकि इन दिनों नालों व तालाबों का पानी सूखने लगता है। चिकनपॉक्स का कारक हर्पिस वायरस गंदे नालियों व नालों के सूखने पर ही पनपता है। कई इलाकों में नालियाँ गंदगी से पटी हैं। इन नालियों के सूखने से हवाओं के साथ वायरस शहर में फैल रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक तापमान बढ़ने के साथ वायरस जनित बीमारियों के और बढ़ने की आशंका है।ं

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