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राज्य सरकार सदियों पुराने नियम -परिनियम में आमूल-चूल परिवर्तन कर उन्हें व्यावहारिक बनाने की कवायद शुरू कर चुकी है। सुशासन के लिए इसे अपरिहार्य मानते हुए नीतीश सरकार ने यह बीड़ा आंध्र प्रदेश सरकार की मॉडल संस्था ‘सेंटर फॉर गुड गवर्नेस’ को सौंपा है। इसके तहत राज्य सरकार विश्वबैंक की मदद से अंग्रेजों के जमाने में बने वित्तीय नियम ,बजट मैनुअल व ट्रेारी संहिता को बदलने जा रही है। नीतीश सरकार के सुधारों में विश्वबैंक दिलचस्पी ले रहा है।ड्ढr ड्ढr सूत्रों ने बताया कि विश्वबैंक के अनुदान से ‘सेंटर फार गुड गवर्नेस’ ने वित्तीय और ट्रेारी के नियमों और उप नियमों को बदल कर ड्राफ्ट तैयार किया है। आधुनिक राज्य में पुराने पड़ चुके नियम व उप नियमों को बदले बिना तेजी से काम नहीं हो सकता। विश्वबैंक ने राज्य सरकार को इसके लिए लगभग 63 लाख रुपए का अनुदान दिया है। ट्रेारी संहिता में ऐसे नियम हैं जो काफी पुराने पड़ चुके हैं। उसमें बिहार-उड़ीसा का नियम चलता है। ऐसे नियमों की आज जरूरत नहीं है। उदाहरण के लिए आज बैंकों के माध्यम से सरकार का काम होता है। कर्मचारियों का वेतन भी सीधे बैंक में जाता है,लेकिन ट्रेारी संहिता में नन बैंकिंग ट्रेारी का प्रावधान है। इसी तरह कार्य विभागों के कारण एजी को समय पर डीसी विपत्र नहीं मिलता। लगभग दस हाार करोड़ रुपए का मामला लंबित है। सरकार का मानना है कि यह विलंब कार्य विभागों के कारण होता है। ऐसे पांच सौ से अधिक डिवीजन हैं। ऐसे में नए सुधार के तहत अब सभी विभागों की तरह एक जगह से पैसा एकाउंट में जाएगा तो विभागों की ही तरह उसका हिसाब होगा। ड्राफ्ट में पुराने और फालतू के प्रावधानों को बदल दिया गया है। आंध्र सरकार की संस्था सेंटर फार गुड गवर्नेस ने बिहार सरकार के बजट मैनुअल, ट्रेारी कोड और वित्तीय नियमावलियों का नया ड्राफ्ट तैयार किया है। इस पर पहले सभी विभागीय सचिवों तथा सभी ट्रेारी अफसरों की राय लेकर समीक्षा की जाएगी। सूत्रों के अनुसार राज्य के सभी ट्रेारी अफसरों की बैठक इस महीने के अंतिम सप्ताह में बुलाई गई है। इसके बाद इसे कैबिनेट में पेश कर पास किया।ं

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