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व्याख्याता नियुक्ित : परिनियम नहीं बना सका राजभवन

राजभवन उच्च शिक्षा में सुधार के चाहे जितने बड़े-बड़े दावे कर रहा हो लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि विश्वविद्यालय चयन कमेटी के गठन होने के एक वर्ष बाद भी राजभवन व्याख्याता नियुक्ित संबंधी परिनियम को अंतिम रूप नहीं दे सका है जिससे राज्य के विश्वविद्यालयों में व्याख्याता नियुक्ित प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही है। इधर पटना विश्वविद्यालय ने शिक्षा विभाग में शिक्षकों की नियुक्ित के लिए जो विज्ञापन निकाला है उसमें सामान्य और आरक्षित वर्गो की रिक्त सीटों को लेकर विवाद है। राज्य सरकार ने पिछले साल अप्रैल में ही बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन कर शिक्षकों की नियुक्ित के लिए बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग को भंग कर विश्वविद्यालय चयन कमेटी का गठन किया था।ड्ढr ड्ढr कमेटी गठन होने के बाद राजभवन को शिक्षक नियुक्ित से संबंधित परिनियम बनाना था। लेकिन राजभवन आज तक परिनियम नहीं बना सका है जिससे हजारों शिक्षकों की नियुक्ित प्रक्रिया बाधित है। इधर राजभवन के प्रधान सचिव एस. के. नेगी ने कहा कि उन्हें इस बार में कोई जानकारी नहीं है। बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में करीब 7 हजार शिक्षकों के पद रिक्त हैं और 1े बाद व्याख्याता नियुक्ित के लिए कोई रिक्ितयां नहीं आई हैं। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार पटना विश्वविद्यालय में 347, मगध विश्वविद्यालय बोध गया में में 1500,भीमराव अम्बेदकर विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर में 500, बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा में 300, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा में 200, जयप्रकाश विश्वविद्यालय छपरा में 450, एल. एन. मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा में 576 एवं कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगा में 400 शिक्षकों के पद रिक्त हैं। राजभवन ने व्याख्याता नियुक्ित के परिनियम को बनाने के लिए पिछले साल ही एक कमेटी बनाई गई थी जिसमें बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति डा. कमर अहसन, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के पूर्व प्रतिकुलपति डा. देवमुनि प्रसाद एवं पटना विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. विभाष कुमार यादव शामिल थे। लेकिन कमेटी ने जो रिपोर्ट दी थी वह काफी विवादित थी। रिपोर्ट के अनुसार एकेडमिक कैलेण्डर और साक्षात्कार पर 50-50 अंक निर्धारित किया गया था लेकिन केन्द्रीय विश्वविद्यालय में 80:20 या 75:25 अंक निर्धारित है। कमेटी ने व्याख्याता नियुक्ित में सुपरविजन करने का अधिकार कुलाधिपति को दिया था लेकिन केन्द्रीय विश्वविद्यालय में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। सबसे मजेदार तथ्य यह है कि कमेटी की रिपोर्ट को राजभवन आज तक ठंडे बस्ते में डाले हुए है जिससे व्याख्याता नियुक्ित प्रक्रिया की गाड़ी आगे नहीं बढ़ रही है।ं

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  • Web Title: व्याख्याता नियुक्ित : परिनियम नहीं बना सका राजभवन