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यूजीसी, विदेशों के शोध प्रस्ताव कूड़ेदान में

यूजीसी और विदेशी एजेंसियों द्वारा रांची यूनिवर्सिटी के शिक्षकों को उच्चस्तरीय शोध के लिए भेजे गये प्रस्ताव कू ड़ेदान की शोभा बढ़ाते हैं। आलम यह है कि पिछले पांच माह में यूजीसी ने शिक्षकों को शोध कार्य से जोड़ने के लिए 60 प्रस्ताव भेजे, जिन पर महज 0.1 प्रतिशत शिक्षकों ने रुचि दिखायी। उच्च शिक्षा के विकास के लिए सरकार करोड़ो रुपये खर्च कर रही है और वीसी शोध को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। बावजूद इसके यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के शिक्षक शोध के प्रति उदासीन हैं।ड्ढr वर्ष 2007-08 में देश-विदेश से लगभग 60 रिसर्च प्रोजेक्ट और फेलोशिप के प्रस्ताव यूनिवर्सिटी के शिक्षकों के लिए आये, लेकिन यूनिवर्सिटी को मात्र पांच आवेदन ही मिले। फुल ब्राइट स्कॉलरशिप(एफबीएस) और कॉमनवेल्थ फेलोशिप के प्रस्ताव अमेरिका और ब्रिटेन से यूजीसी के माध्यम से हर वर्ष मिलते हैं। इसके अलावा यूजीसी से मेजर और माइनर रिसर्च प्रोजेक्ट और आइसीएचआर फेलोशिप के प्रस्ताव मिलते हैं। एसे प्रस्ताव को पाना किसी भी शोधार्थी के लिए सम्मान का विषय है। लेकिन रांची यूनिवर्सिटी में गिनती के शिक्षक ही इन पर काम कर रहे हैं। ऐसे प्रोजेक्ट के लिए यूजीसी 75 हजार से एक लाख रुपये तक देती है। यूजीसी ने शिक्षकों को रिसर्च से जोड़ने के लिए कई सहुलियतें दी हैं। वीसी प्रो एए खान के अनुसार बगैर रिसर्च के उच्च शिक्षा पूरी नहीं हो सकती। यूजीसी रिसर्च को प्रोमोशन के लिए अनिवार्य करने की योजना बना रही है।ड्ढr मार्च का वेतन भेजा गयाड्ढr राज्य की तीनों यूनिवर्सिटी को मार्च माह के वेतन की राशि प्राप्त हो गयी है। शिक्षक और कर्मचारियों के एकाउंट में वेतन राशि मंगलवार को भेजी जायेगी।ड्ढr आज जायेगी पेंशन राशिड्ढr रांची यूनिवर्सिटी में रिटायर शिक्षक और कर्मचारियों के मार्च माह की पेंशन राशि मंगलवार को भेजी जायेगी। पीआरओ एसएस अख्तर के अनुसार पेंशन का विवरण तैयार कर लिया गया है।

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