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केन के साथ ही सूख रहा बाँदा का गला

बुंदेलखण्ड की जीवन रखा मानी जाने वाली केन की धार भी थम सी गई है। अब इसमें नाममात्र पानी बचा है। बहाव भी इतना कम कि पहले कभी ऐसा देखा नहीं गया था। केंद्रीय जल आयोग को अंदेशा है कि अगले महीने तक यह नदी कहीं सूख न जाए। फिलहाल, बाँदा में पानी की कमी को देखते हुए जल संस्थान ने नदी की जलधारा को मोड़कर बोरियों के जरिए रोक दिया है।ड्ढr अब नौबत आ गई है कि बाँदा शहर में पानी के लिए त्राहि-त्राहि न मच जाए। केंद्रीय जल आयोग के अवर अभियंता कालीचरन के मुताबिक केन की धारा 0.3 क्यूबिक मीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से बह रही है। इसके अलावा नदी में पानी भी बस 20 सेमी (गहरा) बचा है। इस गंभीर स्थिति की रिपोर्ट आयोग ने आला अफसरों को भेज दी है।ड्ढr जल संस्थान भी खासा परशान है। केन में बने इनटेक वेलों तक पानी नहीं पहुँच रहा है। पहले गर्मियों में ऐसा कभी नहीं हुआ कि नदी से रो 10 एमएलडी पानी ले पाना मुश्किल हो जाए। जल संस्थान ने जेसीबी से खुदाई कराकर जलधारा इनटेक वेलों की तरफ मोड़ दी है। धारा को रोकने के लिए बालू भरी 37 हाार बोरियाँ लगाई गई हैं। इस जुगत से फिलहाल इनटेक वेलों तक पानी पहुँचने लगा है।ड्ढr जल संस्थान के सहायक अभियंता एसएन शुक्ला ने बताया कि इनटेक वेलों तक पहुँच रहे पानी में से जरूरत भर पानी ही लिया जाएगा, बाकी बोरियों के ऊपर बहकर निकल जाएगा।ड्ढr यमुना का भी जल स्तर घटाड्ढr बाँदा। केन नदी के साथ ही यमुना का भी जलस्तर तेजी से घट रहा है। जल आयोग के मुताबिक सोमवार को चिल्ला में 84.25 मीटर व हमीरपुर में 80मीटर जल स्तर रहा। इतना कम जल स्तर पहली बार हुआ है। चिल्ला में पेयजल के लिए रखा गया बार्ज पूरी तरह से जमीन पर आ गया है। सो, चिल्ला में पानी सप्लाई के लिए नाली के जरिए बार्ज तक पानी पहुँचाया जा रहा है।

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